महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीटों के लिए महायुति गठबंधन ने अपना सीट बंटवारा तय कर लिया है, लेकिन यह प्रक्रिया गठबंधन के भीतर असंतोष का कारण बन गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को उम्मीद से कम सीटें मिलीं, तो वहीं भाजपा और राकांपा (अजित पवार गुट) के भीतर भी स्थानीय स्तर पर विरोध के (Maharashtra MLC Election) स्वर सुनाई दे रहे हैं।
Maharashtra MLC Election – मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी को 6 सीटों की चाहत थी, लेकिन उन्हें 4 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। रायगढ़ सीट पर सुनील तटकरे के बेटे को टिकट मिलने के बाद शिवसेना में स्थानीय स्तर पर असंतोष है। वहीं, नासिक और ठाणे जैसी भाजपा की गढ़ मानी जाने वाली सीटों पर भी शिंदे गुट को जगह मिलने से पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है।
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गठबंधन के लिए सबसे बड़ी मुश्किल पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार और संजय राठौड़ जैसे कद्दावर नेताओं ने खड़ी कर दी है। जालना-संभाजीनगर सीट पर अब्दुल सत्तार ने अपने बेटे का नामांकन दाखिल कराकर गठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार के सामने चुनौती पेश कर दी है। उधर, यवतमाल सीट पर संजय राठौड़ अपनी पत्नी के लिए टिकट चाहते थे, लेकिन नेतृत्व ने मौजूदा सदस्य दुष्यंत चतुर्वेदी पर भरोसा जताकर उन्हें नाराज कर दिया है।
📊 चुनावी गणित
राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि महायुति के पास विधान परिषद की इन 17 सीटों को जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। हालांकि, संख्या बल के बावजूद चुनावी जीत का असली गणित सहयोगी दलों के बीच समन्वय और बगावती तेवरों को शांत करने पर निर्भर करेगा। यदि नामांकन वापसी की आखिरी तारीख तक ये नाराज नेता शांत नहीं हुए, तो गठबंधन को कुछ सीटों पर अनावश्यक राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
