Donald Trump, अमेरिकी उच्च सदन सीनेट में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ एक साल के भीतर दूसरी बार महाभियोग प्रस्ताव भी पारित नहीं हो सका। शनिवार को सौ सदस्यीय सीनेट में 57 के बहुमत ने पूर्व राष्ट्रपति को कैपिटल हिल पर हिंसा भड़काने का दोषी माना। लेकिन दो तिहाई बहुमत यानी 67 वोट नहीं मिलने से महाभियोग प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। रिपब्लिकन की ओर से 43 मत ट्रंप के पक्ष में जरूर पड़े, लेकिन पार्टी के सात सीनेटरों ने ट्रंप के खिलाफ मतदान किया।
उल्लेखनीय है कि कैपिटल हिल में 6 जनवरी को हुई हिंसा में पांच लोगों की जान गई थी। इसके लिए ट्रंप के भाषण को उकसावे की कार्रवाई माना गया था। निचले सदन प्रतिनिधि सभा में पारित होने के बाद यह प्रस्ताव सीनेट को भेजा गया था। खास बात यह है कि सीनेट में महाभियोग प्रक्रिया शुरु होने के पांच दिन में ही फैसला भी हो गया।
‘ट्रंप अमेरिकी इतिहास में पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं, जिनके खिलाफ दो बार महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। पद छोड़ने के बाद महाभियोग का सामना करने वाले वे पहले राष्ट्रपति हैं। इससे पहले फरवरी 2020 में उन पर महाभियोग चला था, जिसमें उन पर यूक्रेन के राष्ट्रपति के जरिये प्रतिद्वंद्वी जो बाइडन के खिलाफ एक मामले में जांचशुरू करवाने के आरोप लगे थे। तब भी उच्च सदन में ही प्रस्ताव गिर गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स
क्या हुआ : पूर्व राष्ट्रपति पर कैपिटल हिल हिंसा को भड़काने के आरोप में महाभियोग का प्रस्ताव सीनेट में नहीं हो सका पारित।क्यों हुआ : 100 में से 67 मत जरूरी थे, सात रिपब्लिकन सांसदों ने ट्रंप के खिलाफ वोट दिया, फिर भी 57 मतों का बहुमत ही मिला। क्या होगा : 2024 या भविष्य में होने वाले किसी राष्ट्रपति में चुनाव भाग ले सकेंगे ट्रंप।

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अमेरिकी लोकतंत्र नाजुक दौर में : बाइडन चुनाव में ट्रंप को हराने वाले राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि सीनेट में महाभियोग प्रस्ताव का गिरना दर्शाता है कि लोकतंत्र कितना नाजुक है। हर अमेरिकी का कर्तव्य है कि वह लोकतंत्र व सत्य की रक्षा करे, इनके लिए हमेशा सतर्क रहे।
उन्होंने अमेरिका में हिंसा और कट्टरपंथ खत्म करने का वादा दोहराया। उन्होंने कहा कि बेशक महाभियोग प्रस्ताव पारित नहीं हुआ, लेकिन आरोप तथ्यात्मक थे। इसके खिलाफ मतदान करने वाले भी मानते थे कि ट्रंप ही कैपिटल हिंसा के लिए नैतिक व व्यावहारिक रूप से जिम्मेदार थे।
किसी भी व्यक्ति के खिलाफ यह सबसे बड़ा अभियान : ट्रंप न्यूयॉर्क। Donald Trump ने महाभियोग को किसी व्यक्ति के खिलाफ छेड़ा गया सबसे बड़ा अभियान करार दिया और कहा कि वे हमेशा कानून के शासन और सम्मानजनक बहस के पक्षधर रहे हैं। मैं अपनी यात्रा जारी रखूंगा, बल्कि ऐतिहासिक और देशभक्तिपूर्ण आंदोलन ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ तो अब शुरू हुआ है। अमेरिका का भविष्य उज्ज्वल और असीम है।

उनके बयान से कयास लगाया जा रहा है कि वे रिपब्लिकन पार्टी में रहकर ही आगे काम करेंगे। पहले माना जा रहा था कि वह नई पार्टी बना सकते हैं। किसी राष्ट्रपति ने नहीं भोगा, जो मैं भोग रहा : महाभियोग पारित हो जाता तो Donald Trump कोई भी राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ पाते। प्रस्ताव गिरने पर 74 साल के ट्रंप ने कहा, किसी भी राष्ट्रपति को यह सब नहीं भोगना पड़ा, जो मैं भोग रहा हूँ।
यह दुखद समय है जब अमेरिका में एक दल को कानून के शासन को कलंकित करने, अनुपालन एजेंसियों को बदनाम करने, भीड़ को उकसाने, दंगाइयों को छोड़ने और न्याय को राजनीतिक बदला लेने के उपकरण में बदलने की छूट मिल चुकी है। एजेंसी
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