उज्जैन : सिंहस्थ 2028 की तैयारियां जोरों पर हैं. शासन, प्रशासन से लेकर साधु-संत भी अपने स्तर पर तैयारियों में जुटे हैं. रविवार को स्थानीय अखाड़ा परिषद में उठापटक हुई. शैव सम्प्रदाय के कुछ संतों ने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद सोमवार को इस्तीफे की सूचना पर वैष्णव सम्प्रदाय के संतों की आपात बैठक हुई. ये बैठक 1 घंटे चली. बैठक के (local akhara parishad was dissolved) बाद स्थानीय अखाड़ा परिषद को भंग कर दिया गया.
इस मामले में हालांकि मामले में अभी शैव सम्प्रदाय का कोई बयान सामने नहीं आया है. स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत रामेश्वर दास वैष्णव सम्प्रदाय से हैं. उनका कहना है “वर्ष 2002 में स्थानीय अखाड़ा परिषद का रजिस्ट्रेशन हुआ था. इसमें सभी सम्प्रदाय के संत थे शैव, वैष्णव लेकिन रविवार को शैव संप्रदाय के 3 महंतों ने अचानक स्थानीय अखाड़ा परिषद से त्यागपत्र दे दिया.”
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local akhara parishad was dissolved – मुझे अध्यक्ष होने के नाते किसी ने सूचित नहीं किया लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी हमें लगी तो हमारे वैष्णव संप्रदाय के सभी संतो ने निर्णय लिया. सोमवार शाम श्री पंच रामानंदीय निर्मोही अखाड़े पर बैठक रखी गई.
महंत रामेश्वर दास का कहना है “वैष्णव सम्प्रदाय के संत और 03 अखाड़े जिसमें निर्मोही, दिगंबर और निर्वाणी अखाडा बैठक में शामिल रहा. इसमें रामादल अखाड़ा परिषद का गठन किया गया. दो-फाड़ वाली कोई बात नहीं है. अखाड़े के गठन के बाद अब शैव से हम एकदम अलग हैं. हमें कोई शिकायत नहीं है. वैचारिक मतभेद हो सकते हैं. वैसे भी हमेशा से सिंहस्थ में अलग-अलग सम्प्रदाय के अनुसार ही घाट, नहान व अन्य व्यवस्थाएं संचालित होती हैं.”
