मुंबई : भारतीय शेयर बाजार के प्राइमरी मार्केट में निवेशकों के लिए कमाई का एक अभूतपूर्व महा-कुंभ शुरू होने जा रहा है। 30 सितंबर की वित्तीय डेडलाइन समाप्त होने से पूर्व दलाल स्ट्रीट (race to launch IPO) पर आईपीओ (IPO) लाने की एक होड़ मच चुकी है। देश की लगभग 34 दिग्गज कंपनियां बाजार से ₹45,000 करोड़ की भारी-भरकम राशि जुटाने के उद्देश्य से अपने पब्लिक इश्यू (Public Issue) लॉन्च करने की पुरजोर तैयारियों में जुटी हैं।
race to launch IPO – बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमानुसार, कंपनियों द्वारा जमा किए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में मार्च तिमाही के ऑडिटेड वित्तीय आंकड़ों (Audited Financials) की वैधता केवल 30 सितंबर तक ही मान्य होती है। इस समय-सीमा के समाप्त होने पर कंपनियों को पुनः नए सिरे से वित्तीय विवरण तैयार कराने पड़ते हैं, जिससे बचने हेतु बाजार में यह हड़बड़ी देखी जा रही है।
टेक्नोलॉजी, फिनटेक, रिटेल, हेल्थकेयर, रिन्यूएबल एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे बहुआयामी सेक्टर्स की इन कंपनियों में रिटेल तथा संस्थागत निवेशकों (DIIs/FIIs) के लिए अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने का यह बेहतरीन अवसर है। सार्वजनिक निर्गमों से जुटाई जाने वाली पूंजी का बड़ा हिस्सा कंपनियां अपने बिजनेस एक्सपेंशन (CapEx) और पुराने कर्जों के पुनर्भुगतान में प्रयुक्त करेंगी, जिससे कॉरपोरेट संवृद्धि को गति मिलेगी।
जुलाई-अगस्त में ₹40,000 करोड़ के IPO कतार में
अगस्त के मध्य तक कई बड़े IPO पहले से ही कतारबद्ध हैं। जुलाई माह में 12 इश्यू के माध्यम से लगभग ₹28,649 करोड़ जुटाए जाने के पश्चात, अगस्त माह में अब तक 8 IPO लॉन्च किए जा चुके हैं, जिनसे ₹10,636 करोड़ जुटाए गए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 के प्रथम सात महीनों में द्वितीयक बाजार (Secondary Market) की उथल-पुथल के बावजूद 39 IPO से ₹51,000 करोड़ जुटाए जा चुके हैं। शाह का अनुमान है कि अकेले जुलाई-अगस्त की अवधि में लगभग ₹40,000 करोड़ के इश्यू कतार में खड़े हैं।
