जबलपुर : एड्स (HIV/AIDS) एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा बीमारी मानी जाती है। सामान्यतः यदि कोई गर्भवती महिला इस वायरस से पीड़ित होती है, तो गर्भस्थ शिशु या जन्म के समय नवजात (health department gets historic success) में संक्रमण फैलने की प्रबल आशंका बनी रहती है। तथापि, इस जानलेवा बीमारी के प्रसार को रोकने की दिशा में जबलपुर से एक अत्यंत राहतकारी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है।
health department gets historic success – जबलपुर स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा विशेषज्ञों ने एड्स से पीड़ित माताओं के बच्चों को एचआईवी के प्रत्यक्ष संक्रमण से सुरक्षित बचाने में सफलता प्राप्त की है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने एक विशेष चिकित्सीय प्रक्रिया के माध्यम से 13 नवजात शिशुओं को ऐसा उपचार प्रदान किया है, जिससे उनमें एचआईवी का कोई भी वायरस नहीं पाया गया है।
‘एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी’ से तोड़ी गई एचआईवी संक्रमण की चेन
जबलपुर स्वास्थ्य विभाग ने एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत यह महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। आधुनिक एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) के सटीक और समयबद्ध प्रयोग के कारण इन मासूमों को जन्मजात बीमारी से बचाना संभव हो सका है। बीते 6 महीनों के भीतर जबलपुर में 15 गर्भवती महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव पाई गई थीं। इनमें से 13 मामलों में समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप कर नवजात शिशुओं को पूरी तरह संक्रमण मुक्त रखा गया। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि प्रोटोकॉल का कठोरता से पालन किया जाए, तो मां से बच्चे में वायरस के हस्तांतरण की चेन को पूरी तरह तोड़ा जा सकता है।
