लुधियाना : जिला प्रशासन की ओर से लगाई जा रही जनगणना (सैंसस) ड्यूटी इस समय प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों और स्कूल मैनेजमैंट के लिए एक बड़ी मुसीबत बनकर खड़ी हो गई है। जमीनी हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि कई नामी प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों ने मैनेजमैंट को लिखित में अल्टीमेटम दे दिया है कि अगर (teachers scared of census duty) उनसे जबरन जनगणना की ड्यूटी कराई गई, तो वे प्राइवेट स्कूल की सम्मानजनक नौकरी ही छोड़ देंगे और घर बैठना पसंद करेंगे, लेकिन इस प्रताड़ना वाली ड्यूटी पर किसी भी कीमत पर नहीं जाएंगे।
⚖️ ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ में फंसी मैनेजमेंट
एक तरफ जहां शिक्षक इस ड्यूटी पर जाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से उन पर लगातार भारी दबाव बनाया जा रहा है और जल्द से जल्द अध्यापकों के नाम भेजने के लिए कहा जा रहा है। स्कूलों का सीधा आरोप है कि जब वे सूची भेजते हैं और संबंधित अध्यापक व्यक्तिगत कारणों से ड्यूटी पर जाने से साफ मना करते हैं, तो प्रशासन और जनगणना विभाग की तरफ से सीधे स्कूलों पर एफ.आई.आर. दर्ज करने और मान्यता रद्द करने जैसी कड़ी धमकियां दी जा रही हैं।
📉 चरमरा गया स्कूलों का पूरा ढांचा
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्राइवेट स्कूलों में आकर जिस मनमाने ढंग से ड्यूटियां बांटी जा रही हैं, उससे स्कूलों का पूरा अकादमिक ढांचा चरमरा गया है। शहर के एक स्कूल का उदाहरण सामने आया है जहां करीब 150 टीचर्स का स्टाफ है, वहां एक साथ बड़ी संख्या में ड्यूटियां लगा दी गईं। वहीं एक अन्य स्कूल का मामला सामने आया है (teachers scared of census duty) जिसमें कुल 85 टीचर्स का स्टाफ है और वहां 85 में से 70 अध्यापकों की ड्यूटी अकेले इस जनगणना कार्य में लगा दी गई है, जिससे स्कूल पूरी तरह खाली हो चुके हैं।


