पलामू : झारखंड में भाषा को लेकर विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी ने आंदोलन की शुरुआत की है. भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने पलामू के (language dispute) मेदिनीनगर के छहमुहान पर आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया और मानव श्रृंखला का निर्माण किया. करीब दो घंटे तक यह प्रदर्शन जारी रहा.

झारखंड पात्रता परीक्षा में पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के लिए स्थानीय भाषा के रूप में नागपुरी और कुडुख (उरांव) का चयन किया है. जबकि पलामू, गढ़वा के इलाके में सबसे अधिक भोजपुरी, नागपुरी एवं अंगिका भाषा बोली जाती है. इन भाषाओं को स्थानीय भाषा के रूप में शामिल करने की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का यह प्रदर्शन था.

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भारतीय जनता पार्टी की तरफ से यह आंदोलन का पहला चरण है. अगले चरण में रांची में प्रदर्शन किए जाएंगे. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने झारखंड की सरकार पर सौतेला व्यवहार अपनाने का आरोप लगाया. विधायक आलोक चौरसिया ने कहा कि पलामू के इलाके के लोगों को उनका हक एवं अधिकार देना होगा, भोजपुरी, मगही एवं अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा दिया जाए. सरकार पलामू के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार नहीं करे.

language dispute – विधायक डॉ शशिभूषण मेहता ने कहा कि पलामू के युवाओं के साथ गलत हो रहा है. उड़िया और बंगाली को स्थानीय भाषा का दर्जा मिल सकता है तो भोजपुरी और मगही को क्यों नहीं? मेयर अरुणा शंकर ने कहा कि युवा एवं छात्रों का आंदोलन जारी रहेगा जब तक उनके हक एवं अधिकार नहीं मिल जाते हैं.

 

 

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