हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती किन्नौर जिले में तिब्बत सीमा के समीप स्थित अति पवित्र किन्नर कैलाश यात्रा 2026 (Kinner Kailash Yatra) इस बार 30 जुलाई से विधिवत रूप से शुरू होने जा रही है। समुद्र तल से लगभग 6,050 मीटर (19,849 फीट) की दुर्गम ऊंचाई पर स्थित और पंच कैलाशों में शामिल इस पावन धार्मिक यात्रा के लिए इस वर्ष श्रद्धालुओं को पूर्व-पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना पूरी तरह अनिवार्य किया गया है। स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध रजिस्ट्रेशन के किसी भी यात्री को यात्रा मार्ग पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
Kinner Kailash Yatra – प्रशासनिक शेड्यूल के अनुसार, यह धार्मिक यात्रा 30 जुलाई से 10 अगस्त तक आयोजित की जाना प्रस्तावित है। हालांकि, यात्रा की पूरी अवधि इस दौरान बनने वाले मौसम के मिजाज और भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा प्रबंधन को सुचारू रखने के लिए प्रतिदिन केवल सीमित संख्या में ही भक्तों को आगे जाने की इजाजत दी जाएगी।
28 जुलाई से शुरू होंगे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
उपमंडलाधिकारी (SDM) कल्पा एवं यात्रा आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण भारद्वाज ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि किन्नर कैलाश यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 28 जुलाई से आधिकारिक पोर्टल पर शुरू कर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, जो श्रद्धालु मौके पर पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराना चाहते हैं, उनके लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन केंद्र 30 जुलाई से कार्य करना शुरू करेंगे।
क्या है किन्नर कैलाश यात्रा की पौराणिक मान्यता और महत्व?
किन्नर कैलाश यात्रा हिमालय की गोद में बसी एक अत्यंत पवित्र और अलौकिक प्राकृतिक शिवलिंग की तीर्थयात्रा है। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण चोटी पर स्थित लगभग 79 फीट ऊंचा विशाल प्राकृतिक शिवलिंग है, जो दिन के अलग-अलग समय में अपना रंग बदलता है। हिंदू धर्मग्रंथों में इसका उल्लेख पंच कैलाशों में से एक के रूप में मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पावन स्थल भगवान शिव और माता पार्वती का शीतकालीन (सर्दियों का) दिव्य निवास स्थान माना जाता है।


