ईरान की सड़कों पर एक बार फिर व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं. बीते तीन दिनों से देश की सड़कों, गलियों और छतों से एक ही नारा गूंज रहा है-तानाशाह मरेगा. ये नारे सीधे तौर पर ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को चुनौती देते हैं. 86 वर्षीय खामेनेई, जिन्होंने दशकों तक अपने शासन को (civil war breaks out) घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खतरों से बचाने की कोशिश की, आज अपने अब तक के सबसे कठिन दौर का सामना कर रहे हैं.
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देश के भीतर बढ़ता जन असंतोष, गहराता आर्थिक संकट और बाहर से बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव उनके शासन की नींव को लगातार कमजोर कर रहा है. अब सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान एक बड़े राजनीतिक बदलाव की दहलीज पर खड़ा है? आइए, इन 5 अहम संकेतों के जरिए समझने की कोशिश करते हैं कि हालात किस ओर इशारा कर रहे हैं.
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civil war breaks out – ईरान के युवा अब खुले तौर पर इस्लामिक नियमों की अवहेलना कर रहे हैं. दिसंबर के शुरुआत में किश आइलैंड पर हुई एक मैराथन इसकी मिसाल है, जहां सैकड़ों महिलाएं बिना हिजाब या ढीले-ढाले बालों के साथ दौड़ती नजर आईं. आयोजकों की ओर से दिए गए हेडस्कार्फ को उन्होंने नजरअंदाज कर दिया. जिस देश में ड्रेस कोड तोड़ने पर जुर्माना और जेल तक हो सकती है, वहां युवाओं का यह रवैया साफ संकेत है कि सत्ता का डर कमजोर पड़ चुका है.
