सनातन धर्म में कल्कि जयंती का अत्यंत पावन और विशेष धार्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कल्कि जगत के पालनहार भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार होंगे, जो कलियुग के अंतिम (Kalki Jayanti today) चरण में धर्म की पुनर्स्थापना के लिए प्रकट होंगे।

Kalki Jayanti today – यद्यपि भगवान कल्कि का अवतरण होना अभी शेष है, परंतु उनके भावी अवतार की स्मृति और स्वागत स्वरूप प्रतिवर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है। मान्यता है कि जब संसार में अधर्म अपनी चरम सीमा पर होगा, तब भगवान कल्कि अधर्मियों का विनाश कर सतयुग की नींव रखेंगे।

आज मनाई जा रही है कल्कि जयंती: जानिए शुभ पूजा मुहूर्त और समय

पंचांग गणना के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि प्रारंभ होकर 18 अगस्त की शाम को संपन्न हो रही है:

    • तिथि प्रारंभ: 17 अगस्त को शाम 5:00 बजे

    • तिथि समापन: 18 अगस्त को शाम 5:50 बजे

    • पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: कल्कि जयंती की पूजा के लिए संध्या काल अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। पूजन का सबसे उत्तम मुहूर्त शाम 4:21 बजे से शाम 5:50 बजे तक रहेगा।

       

कौन हैं भगवान कल्कि? सफेद घोड़े पर सवार तेजस्वी दिव्य योद्धा का स्वरूप

श्रीमद्भागवत महापुराण एवं अन्य पौराणिक धर्मग्रंथों में भगवान कल्कि के प्राकट्य और स्वरूप का विस्तार से उल्लेख मिलता है:

    • जन्म स्थान: मान्यता के अनुसार, उनका प्राकट्य संभल ग्राम में विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर होगा।

    • दिव्य स्वरूप: कल्कि देव एक महापराक्रमी योद्धा के रूप में ‘देवदत्त’ नामक तेजस्वी सफेद घोड़े पर सवार होंगे।

    • अस्त्र-शस्त्र: उनके हाथ में एक चमचमाती दिव्य तलवार होगी, जिससे वे समस्त कलियुगी दुष्टों, म्लेच्छों और अधर्मियों का संहार कर धर्म का राज स्थापित करेंगे।

       

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