डिंडौरी : पवित्र सावन मास के शुभारंभ के साथ ही देश भर के शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंज रहे हैं। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में स्थित ‘ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर’ की महिमा अत्यंत अनूठी और हृदय को छू लेने वाली है। सनातन मान्यता है कि सावन के पावन अवसर पर इस धाम में श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन और (Rin Mukteshwar Dham of Dindori) जलाभिषेक करने से भक्तों को सांसारिक व आर्थिक कर्ज से ही नहीं, अपितु पितृ ऋण, देव ऋण और गुरु ऋण से भी सदैव के लिए मुक्ति प्राप्त हो जाती है।
मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर कुकर्रामठ गांव में स्थित यह भव्य शिव मंदिर करीब 1000 वर्ष प्राचीन माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण कल्चुरी राजवंश के शासनकाल (8वीं से 10वीं शताब्दी) में हुआ था। वास्तुकला की दृष्टि से जहाँ अधिकांश शिव मंदिर पूर्व दिशा की ओर अभिमुख होते हैं, वहीं यह मंदिर दुर्लभ रूप से ‘पश्चिममुखी’ है। मंदिर के गर्भगृह में लगभग 3 फीट ऊंचा अलौकिक शिवलिंग स्थापित है।
साहूकार, लाखा बंजारा और वफादार कुत्ते की कथा, ऐसे पड़ा गांव का नाम ‘कुकर्रामठ’
इस मंदिर की स्थापना और ‘कुकर्रामठ’ नामकरण के पीछे अत्यंत मार्मिक इतिहास जुड़ा हुआ है। प्राचीनकाल में कंचनीपुर (वर्तमान कुकर्रामठ) में लाखा बंजारा नामक व्यापारी रहता था। उसने आर्थिक तंगी के कारण अपने चतुर व वफादार कुत्ते को एक साहूकार के पास गिरवी रख दिया। एक रात साहूकार के घर चोरी होने पर कुत्ते ने सूझबूझ से छिपाया गया खजाना बरामद करवा दिया।
Rin Mukteshwar Dham of Dindori – साहूकार ने प्रसन्न होकर बंजारे का संपूर्ण कर्ज माफ कर दिया और कुत्ते के गले में ऋण-मुक्ति पत्र बांधकर उसे आजाद कर दिया। रास्ते में कुत्ते को आते देख लाखा बंजारे ने समझा कि कुत्ता भागकर आया है और क्रोध में लाठी मारकर उसकी जान ले ली। पत्र पढ़ने के बाद पश्चाताप में बंजारे ने अपने वफादार कुत्ते (स्थानीय भाषा में ‘कुकुर’) की याद में यहाँ स्मारक बनवाया, जिससे आगे चलकर इस स्थान का नाम ‘कुकर्रामठ’ पड़ा।
