एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 900 करोड़ रुपये के ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) घोटाले के मामले में राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को अरेस्ट कर लिया है. अधिकारियों के मुताबिक, ये मामला महेश जोशी के (Mahesh Joshi arrested) लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) मंत्री के कार्यकाल के दौरान टेंडर आवंटन में हुई अनियमितताओं से जुड़ा है.उन पर अपने पद का दुरुपयोग करने और टेंडर देने के बदले रिश्वत लेने का आरोप है. इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इसी मामले में जोशी को गिरफ्तार किया था.

जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले के मामले में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने पहले पूर्व मंत्री महेश जोशी और 22 और अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी. आरोपियों की सूची में JJM के वित्तीय सलाहकार सुनील शर्मा, तत्कालीन मुख्य अभियंता राम करण मीणा, दिनेश गोयल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, रमेश चंद मीणा, परितोष गुप्ता, अधीक्षण अभियंता निरेल कुमार, विकास गुप्ता, महेंद्र प्रकाश सोनी, भगवान सहाय जाजू, जितेंद्र शर्मा और अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना सहित अन्य लोग शामिल हैं.

2024 में दर्ज की गई थी एफआईआर

अधिकारियों ने बताया कि ACB को एक ईमेल ID के जरिए अहम सुराग मिला, जिससे जांचकर्ता कई खातों तक पहुंचे और आखिरकार इसमें शामिल अधिकारियों के नाम सामने आ गए. आरोपों के मुताबिक, टेंडर फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर दिए जा रहे थे, जिससे इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ.

Mahesh Joshi arrested – सितंबर 2023 में ACB ने जाली सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करके टेंडर हासिल करने के आरोप में श्याम ट्यूबवेल और गणपति ट्यूबवेल के खिलाफ FIR दर्ज की. ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने एक मामला दर्ज किया और छापेमारी की. केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद, CBI ने भी 3 मई, 2024 को एक मामला दर्ज किया. 4 मई, 2024 को ED ने अपनी जांच पूरी कर ली और सबूत तथा दस्तावेज ACB को सौंप दिए. 30 अक्टूबर, 2024 को ACB ने पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की.

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