नई दिल्ली: 1993 के चर्चित बोबाजार बम धमाकों के दोषी मोहम्मद राशिद खान की रिहाई को लेकर कानूनी पेंच फंस गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर राशिद खान को नोटिस जारी किया है। जस्टिस पीके मिश्रा और संजीव सचदेवा की वेकेशन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए 4 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। गौरतलब है (Kolkata Blast 1993) कि दिल्ली हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे राशिद खान को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया था, जिसे राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
Kolkata Blast 1993 – राज्य सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि राज्य के ‘सेंटेंस रिव्यू बोर्ड’ (SSRB) ने पहले ही खान की रिहाई के खिलाफ सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं था, बल्कि TADA (टाडा) के तहत दर्ज मामला था, जिसमें बम धमाकों के कारण लगभग 69 निर्दोष लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे।
दूसरी ओर, राशिद खान की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट एमआर शमशाद ने दलील दी कि खान 33 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मामले में सह-आरोपी पन्नालाल जायसवाल को 2014 में समय से पहले रिहा कर दिया गया था, इसलिए उनके मुवक्किल को भी समानता के आधार पर राहत मिलनी चाहिए। राशिद खान ने अपनी बढ़ती उम्र (77 वर्ष) और स्वास्थ्य समस्याओं का भी हवाला दिया है।
अदालत का सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट किया कि मोहम्मद राशिद खान और सह-आरोपी की भूमिकाएं समान नहीं थीं। बेंच ने माना कि इस भीषण बम धमाके का मुख्य ‘मास्टरमाइंड’ राशिद खान ही था। हालांकि हाई कोर्ट ने खान के जेल व्यवहार और लंबी सजा को आधार मानकर रिहाई के आदेश दिए थे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद खान की रिहाई पर तलवार लटक गई है।


