जमशेदपुर : झारखंड की लौहनगरी जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित एक प्रतिष्ठित स्कूल के सभागार में शुक्रवार को ‘पर्वतों और नदियों के संरक्षण’ के बेहद संवेदनशील विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में देश के कोने-कोने से आए (conservation of mountains and rivers) प्रख्यात पर्यावरणविद, प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, जल विशेषज्ञ, भू-वैज्ञानिक और बुद्धिजीवी मुख्य रूप से शामिल हुए हैं।
पर्यावरण को समर्पित यह महत्वपूर्ण सम्मेलन जमशेदपुर पश्चिम के विधायक और वरिष्ठ नेता सरयू राय की विशेष दूरदर्शी पहल पर आयोजित किया गया है। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में देश के कोने-कोने से आए प्रतिनिधियों ने पर्यावरण के मौजूदा संकटों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
इसे भी पढ़ें – केंद्र पर बरसे JMM नेता सुप्रियो भट्टाचार्य; बोले—झारखंड का GST रोककर आर्थिक कमर तोड़ रही सरकार
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य आयोजक सह विधायक सरयू राय ने कहा कि पर्वत किसी भी देश या सभ्यता के लिए प्रकृति द्वारा निर्मित पहली और सबसे मजबूत आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) होते हैं। उन्होंने वैश्विक संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि आज भारत में नदियों के साथ-साथ पर्वतों के मूल स्वरूप को कानूनी रूप से संरक्षित करने के लिए एक बेहद कड़े और नए कानून के निर्माण की तत्काल आवश्यकता है।
conservation of mountains and rivers – इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा ने मुख्य अतिथि के रूप में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि देश के प्रसिद्ध जल संरक्षणवादी और पर्यावरणविद ‘जलपुरुष’ राजेंद्र सिंह सम्मेलन के मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस दौरान कानूनी और वैज्ञानिक विशेषज्ञों ने अंधाधुंध खनन के कारण नष्ट हो रहे पहाड़ों को बचाने पर गंभीर विचार रखे।


