बांग्लादेश में हफ्तेभर बाद आम चुनाव होने वाले हैं. चुनाव से ठीक पहले कट्टर इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर खुद को एक नया और मानवीय बांग्लादेश (deception or election trick) बनाने वाली ताकत के तौर पर पेश करने की कोशिश की है. हालांकि पार्टी के इस घोषणा पत्र को लेकर सवाल उठने लगे हैं. खासतौर पर हिंदुओं, महिलाओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए किए गए वादों को कई लोग महज दिखावा और चुनावी रणनीति मान रहे हैं.

इसे भी पढ़ें – महायुद्ध की आहट? अमेरिकी युद्धपोत के पास पहुंचा ईरानी ड्रोन, फाइटर जेट ने मार गिराया

बांग्लादेश की राजनीति में जमात-ए-इस्लामी का नाम आते ही विवाद आप जुड़ जाता है. 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान का साथ देने, युद्ध अपराधों के आरोप झेलने और बाद के वर्षों में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं, पर हमलों से जुड़े आरोपों ने पार्टी की छवि को लंबे समय तक कठघरे में खड़ा रखा है. ऐसे में जमात का पुराना रिकॉर्ड और उसका मौजूदा एजेंडा इन नए दावों से मेल नहीं खाता, और यही वजह है कि उसके चुनावी वादों पर भरोसा करना कई लोगों को मुश्किल लग रहा है.

इसे भी पढ़ें – बलूचिस्तान में क्यों बेबस हुई पाकिस्तानी सेना? रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुद खोली अपनी सरकार की पोल

deception or election trick – ढाका के एक होटल में पार्टी प्रमुख शफीकुर रहमान ने सुरक्षित और मानवीय बांग्लादेश नाम से घोषणा पत्र जारी किया. इसमें सरकार चलाने के लिए 26 प्राथमिक क्षेत्रों का जिक्र किया गया है. पार्टी ने न्याय आधारित राज्य, भ्रष्टाचार मुक्त शासन, युवाओं को नेतृत्व में लाने और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल देने जैसे बड़े-बड़े वादे किए हैं. जमात का कहना है कि वह एक भेदभाव-मुक्त बांग्लादेश बनाएगी, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे.

 

Share.
Exit mobile version