जगदलपुर के बकावंड तहसील अंतर्गत मैलबेड़ा और आसपास के गांवों में एक पटवारी का कथित भ्रष्टाचार सुर्खियों में है। कोलावल हल्का के पूर्व पटवारी उपेंद्र बघेल पर आरोप है कि उसने पट्टा, नामांतरण और सीमांकन जैसे राजस्व कार्यों के नाम पर ग्रामीणों से लाखों रुपये ठगे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि काम न होने के कारण कई गरीब किसानों को अपनी मेहनत की कमाई और यहां तक कि खेती के लिए जरूरी बैल तक बेचने पड़े।
📋 पीड़ितों की आपबीती: किसी ने बेचा बैल, तो किसी ने दिया बकरा
ठगी का शिकार हुए ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा साझा की:
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लालाराम (किसान): पट्टा बनवाने के लिए 10 हजार रुपये एडवांस दिए, पटवारी अब फरार है।
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मंगतू (किसान): पटवारी को 40 हजार नकद और एक बकरा दिया, लेकिन काम नहीं हुआ।
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संपत (ग्रामीण): पट्टा बनवाने के लिए अपने बैलों की जोड़ी बेचकर 30 हजार रुपये दिए, फिर भी दस्तावेज नहीं मिले।
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रुपसाय (ग्रामीण): किश्तों में कुल 55 हजार रुपये दिए, लेकिन पटवारी पैसे लेकर गायब हो गया।
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बुधराम नेताम: आरोप है कि पटवारी ने 6 लाख की जमीन बिकवाने के एवज में किसान से 2 लाख रुपये वसूले, लेकिन किसी का भी काम पूरा नहीं किया।
⚖️ प्रशासनिक जांच और घेराव की चेतावनी
ग्रामीणों ने अब एकजुट होकर बकावंड एसडीएम से मामले की शिकायत की है। एसडीएम मनीष वर्मा ने कहा, “पटवारी उपेंद्र बघेल के खिलाफ शिकायत मिली है, इसकी निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि वह दोषी पाया जाता है, तो चाहे वह कहीं भी पदस्थ हो, उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।” वहीं, आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके पैसे वापस नहीं मिले और आरोपी पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे।
संपादकीय टिप्पणी: गरीब किसानों को सरकारी दफ्तरों के ऐसे चक्रव्यूह और भ्रष्टाचार से बचाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। क्या आपको लगता है कि राजस्व कार्यों के लिए एक पारदर्शी ‘ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम’ लागू करना इस तरह के घोटालों को रोकने का प्रभावी उपाय हो सकता है? अपने विचार नीचे साझा करें।


