वेस्ट बैंक में इजराइल की हालिया नीतियों ने जॉर्डन में चिंता की लहर पैदा कर दी है. अम्मान के सियासी और सुरक्षा हलकों में अब खुलकर चर्चा हो रही है कि क्या फिलिस्तीनियों को धीरे-धीरे जॉर्डन की ओर धकेलने की पुरानी सोच जमीन पर उतर रही है. सवाल है कि क्या वेस्ट बैंक के बाद अब जॉर्डन अगला दबाव (Israel-Jordan Tension) झेलने वाला देश है?
Israel-Jordan Tension – दरअसल इजराइली कैबिनेट ने वेस्ट बैंक की बड़ी जमीनों को राज्य भूमि के रूप में दर्ज करने का फैसला किया है. अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब यह प्रक्रिया सीधे इजराइल के न्याय मंत्रालय के तहत होगी. इजराइल के वित्त मंत्री Bezalel Smotrich ने इसे बस्तियों के विस्तार की दिशा में अहम कदम बताया है.
जॉर्डन को क्या डर है?
जॉर्डन को डर है कि इससे पुराने उस्मानी और जॉर्डन काल के भूमि रिकॉर्ड कमजोर पड़ सकते हैं, जो अब तक फिलिस्तीनियों के संपत्ति अधिकारों की कानूनी ढाल रहे हैं. अगर ये रिकॉर्ड अप्रासंगिक हो गए, तो बस्तियों का विस्तार तेज होगा और स्थानीय आबादी पर दबाव बढ़ेगा.
सॉफ्ट ट्रांसफर की आशंका
अम्मान की चिंता सिर्फ टैंकों और सैनिकों को लेकर नहीं है. असली डर उस माहौल से है जिसमें वेस्ट बैंक को रहने लायक न छोड़ा जाए. लगातार सैन्य अभियान, शरणार्थी कैंपों में कार्रवाई और आर्थिक मुश्किलें, इन सबके बीच यह आशंका जताई जा रही है कि लोगों को धीरे-धीरे जॉर्डन की ओर पलायन के लिए मजबूर किया जा सकता है. जेनिन और तुल्कारेम जैसे इलाकों में बढ़ती सख्ती ने जॉर्डन के सुरक्षा तंत्र को सतर्क कर दिया है. अगर बड़ी संख्या में लोग सीमा की तरफ बढ़ते हैं, तो हालात तेजी से बदल सकते हैं.
