पतवार… जो लहरों से टकराकर नाव को किनारे लगाती है, लेकिन जबलपुर के बरगी बांध पर यही पतवार एक 12 साल के मासूम का भविष्य डुबो रही थी. जिस उम्र में हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वहां (innocent child will go to school) गरीबी ने अभिषेक को नाव चलाने पर मजबूर कर दिया था. लेकिन महिला सब इंस्पेक्टर की नजर जब इस बाल नाविक पर पड़ी, तो उनका ममतामयी हृदय पसीज गया. उन्होंने न केवल अभिषेक का दाखिला कराया, बल्कि स्कूल फॉर्म पर खुद अभिभावक बनकर हस्ताक्षर भी किए.
innocent child will go to school – आज अभिषेक के हाथों में पतवार नहीं, बल्कि सुनहरे भविष्य की कलम है. समाज में पुलिस के कई चेहरे देखे गए हैं. कहीं पुलिस मुसीबत बनी, तो कहीं रक्षक, लेकिन संस्कारधानी जबलपुर के बरगी से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने न केवल खाकी का मान बढ़ाया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि अगर दिल में इंसानियत हो, तो एक छोटा सा कदम किसी का पूरा भविष्य रोशन कर सकता है.
नाव चलाता दिखा मासूम
यह कहानी शुरू होती है बरगी बांध के विसर्जन घाट से, बरगी चौकी प्रभारी सरिता पटेल गणेश विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही थीं. चारों ओर भीड़ थी, जयकारे लग रहे थे, लेकिन इसी बीच सरिता की नजर एक 12 साल के मासूम बच्चे पर पड़ी, जो बड़ी फुर्ती से नाव (पतवार) चला रहा था. इतनी कम उम्र के बच्चे को खतरनाक लहरों के बीच नाव चलाते देख सरिता चौंक गईं. उन्होंने बच्चे को पास बुलाया और उसकी उम्र और इस काम के पीछे की वजह पूछी.
अभिभावक के तौर पर किए हस्ताक्षर
अभिषेक की आंखों में पढ़ाई की चमक और चेहरे पर मजबूरी देख सरिता पटेल ने तुरंत फैसला किया कि वे इस बच्चे का बचपन नहीं डूबने देंगी. उन्होंने खुद अभिषेक की पढ़ाई का जिम्मा उठाया. अभिषेक के माता-पिता पास नहीं थे, तो सरिता खुद बरगी नगर के शासकीय स्कूल पहुंचीं. उन्होंने न केवल अभिषेक की फीस भरी, बल्कि स्कूल फॉर्म पर अभिभावक के तौर पर अपने हस्ताक्षर भी किए.


