सीने में जलन, अपच, पेट का फूलना और खट्टी डकार आना—भारत में बिगड़े हुए पाचन तंत्र का शिकार बड़ी संख्या में लोग हैं। चिकित्सीय भाषा में इसे GERD (गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज या एसिड रिफ्लक्स) कहा जाता है। यद्यपि इससे पीड़ित लोगों का कोई सटीक सरकारी आंकड़ा (acidity problem) उपलब्ध नहीं है, किंतु अनुमानतः 10 में से 5 लोग किसी न किसी रूप में इसकी चपेट में अवश्य हैं।

acidity problem – स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एसिडिटी की समस्या अचानक उत्पन्न नहीं होती; बल्कि लंबे समय तक अनियमित खान-पान और बिगड़े हुए पाचन के कारण यह जन्म लेती है। शुरुआती लक्षणों में सीने में जलन रहती है, जिसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो दांतों के इनेमल घिसने से लेकर आहार नली को गंभीर क्षति पहुँच सकती है।

 क्या अधिक चीनी खाने से सीधे बढ़ती है एसिडिटी? 

अक्सर लोग यह मानते हैं कि केवल मसालेदार, तला-भुना या तीखा खाना ही एसिडिटी का कारण बनता है। इस विषय पर कैलाश दीपक हॉस्पिटल के सीनियर कंसलटेंट (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी) डॉ. जतिंद्र सिंह भोगल बताते हैं कि अधिकांश लोगों को लगता है कि चीनी खाने से सीधे एसिड रिफ्लक्स होता है, किंतु यह पूरी तरह सही नहीं है। केवल चीनी को एसिडिटी का सीधा कारण नहीं माना जा सकता, यद्यपि जिन खाद्य पदार्थों में शर्करा (शुगर) की मात्रा अधिक होती है, वे आपकी परेशानी को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

 एसिडिटी और सीने की जलन से बचाव के लिए रखें इन बातों का ध्यान

यदि आपको प्रतीत होता है कि मीठा अथवा भारी भोजन करने के बाद आपकी समस्या बढ़ जाती है, तो ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें और एक फूड डायरी (Food Diary) बनाएं ताकि आप पहचान सकें कि कौन-कौन सी चीजें आपके लिए ‘ट्रिगर’ का काम कर रही हैं।

    • एक ही बार में अत्यधिक भोजन करने से बचें, छोटे-छोटे अंतराल पर खाएं।

    • भोजन करने के तुरंत बाद लेटें नहीं; कम से कम 2 से 3 घंटे तक टहलें या बैठे रहें।

    • अपने शरीर का वजन संतुलित रखें और अत्यधिक वसायुक्त भोजन से परहेज करें।

 

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