एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गृह मंत्रालय ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन किया है, जिससे पूर्ववर्ती राज्य के उपराज्यपाल की कुछ शक्तियों में वृद्धि हुई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 55 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नियम में संशोधन को (increased LG powers) अपनी मंजूरी दे दी है, जिसे अधिनियम की धारा 73 के तहत जारी 31 अक्टूबर 2019 की घोषणा के साथ पढ़ा गया है। 

इसे भी पढ़ें – NEET पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, केंद्र और NTA  ने दायर किया अपना जवाब  

ये हुआ है मुख्य संशोधन 

बता दें क 42ए के अनुसार कोई भी प्रस्ताव जिसके लिए अधिनियम के तहत ‘पुलिस’, ‘सार्वजनिक व्यवस्था’, ‘अखिल भारतीय सेवा’ और ‘भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो’ (ACB) के संबंध में वित्त विभाग की पूर्व सहमति जरूरी है, तब तक स्वीकृत या अस्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि इसे मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल के समक्ष नहीं रखा जाता है। 

 increased LG powers – वहीं, 42बी- अभियोजन स्वीकृति देने या अस्वीकार करने या अपील दायर करने के संबंध में कोई भी प्रस्ताव विधि विभाग द्वारा मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल के समक्ष रखा जाएगा। 

Share.
Exit mobile version