हिंदू धर्म में होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इस अग्नि को देखना शुभ नहीं होता. 3 मार्च 2026 को होने वाले (these people should not watch fire of holika dahan) होलिका दहन के समय कुछ विशेष परिस्थितियों वाले लोगों को अग्नि की लपटों से दूर रहने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि होलिका की अग्नि जलते समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तीव्र होता है, जो कुछ लोगों पर बुरा प्रभाव डाल सकता है.
नवविवाहित स्त्रियों के लिए अग्नि दर्शन क्यों है वर्जित?
शास्त्रों के अनुसार, जिन स्त्रियों का विवाह हाल ही में हुआ है और उनकी शादी के बाद यह पहली होली है, उन्हें होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. इसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि होलिका की अग्नि जलते हुए शरीर का प्रतीक मानी जाती है, जिसे देखना नई दुल्हन के वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता. इसे पुरानी साल की विदाई के रूप में देखा जाता है और नवविवाहिता का जीवन एक नई शुरुआत का प्रतीक है, इसलिए इन दोनों ऊर्जाओं का मिलन वर्जित है.
गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए सावधानी
गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन की अग्नि और उसके धुएं से दूर रहने की सख्त सलाह दी जाती है. इस समय वातावरण में ऊर्जा का उतार-चढ़ाव बहुत अधिक होता है. माना जाता है कि होलिका की अग्नि की उग्रता गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है. इसी तरह, छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं को भी दहन स्थल (these people should not watch fire of holika dahan) पर नहीं ले जाना चाहिए. बच्चों का मन बहुत कोमल और उनकी ऊर्जा बहुत कोमल होती है, जिससे उन पर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव जल्दी होने की आशंका रहती है.
