Rangbhari Ekadashi 2026: आज फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है. इसे आमलकी एकादशी के रूप में जाना जाता है. काशी में इस दिन रंगभरी एकादशी मनाई जाती है. इस दिन से काशी में होली की शुरुआत हो जाती है. रंगभरी एकादशी भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित पर्व है. रंगभरी एकादशी के दिन महादेव काशी के लोगों के साथ होली खेलते हैं.

मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भोलेनाथ माता गौरा का गौना लेकर आते हैं. इस दिन भगवान शिव माता पार्वती के साथ काशी आते हैं. रंगभरी एकादशी के दिन भव्य उत्सव के साथ होली का आगाज हो चुका है. काशी वासियों को मंदिर प्रांगण में होली खेलने के लिए आमंत्रित किया गया है. मंदिर प्रांगण में होली खेलने के लिए रंग, अबीर और गुलाल की व्यवस्था की गई है.

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जानकारी के अनुसार, जल प्रतिमा यानी जो बाहर से भोले बाबा की प्रतिमा आती है उसमें काशी की संकरी गलियों से गुजरना पड़ता है. इसके लिए पुलिस प्रसाशन और महंत परिवार की बैठक हो चुकी है. उन्होंने बताया है कि हम 64 लोगों की संख्या में जल प्रतिमा लेकर आएंगे तो इतने ही लोगों की लीमिट बनाई गई है. प्रतिमा को लाने के बाद काशी की संस्कृति केे अनुसार, उसको गर्भृह में विराजमान किया जाएगा.

इसके बाद प्रतिमा की सप्तऋषि आरती और अन्य प्रकार का पूजन किया जाएगा. इस बार शिवाश्रम मंच के अंतर्गत होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में रंग, गुलाल और अबीर लोगों के खेलने के लिए नहीं होंगे. इस बार (Rangbhari Ekadashi 2026) वहां फूलों की होली खेलने की व्यवस्था की गई है. ये कार्यक्रम रात को 10 बजे तक रहेगा. अंतिम कार्यक्रम फूलों की होली का होगा, जिसे ब्रज की एक टोली करेगी.

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