रांची : सरकारी नौकरी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और धांधली को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। राज्य सरकार ने एक साथ 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने, 6 आगामी परीक्षाओं को फिलहाल रोकने और वर्ष 2013 से लेकर अब तक आयोजित 17 पुरानी (historic decision on recruitment) भर्ती प्रक्रियाओं को अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विस्तृत जांच के दायरे में लाने का कठोर निर्णय लिया है।

 नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल 

सरकार के इस व्यापक फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है और विपक्ष ने तीखा हमला बोला है:

    • विपक्ष की प्रतिक्रिया: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार के इस कदम पर सवाल खड़े करते हुए निष्पक्षता पर संदेह जताया है।

    • अध्यक्षों की भूमिका पर सवाल: उन्होंने कहा कि यदि सीआईडी जांच में मिली गड़बड़ी और धांधली के आधार पर इतनी बड़ी संख्या में परीक्षाएं रद्द की जा रही हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी।

    • गिरफ्तारी की मांग: बाबूलाल मरांडी ने प्रश्न उठाया कि पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते की तर्ज पर वर्तमान जेएसएससी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार की गिरफ्तारी क्यों नहीं की जा रही है।

 

 क्यों खास और ऐतिहासिक है झारखंड सरकार का यह फैसला?

इस निर्णय को झारखंड की भर्ती प्रणाली में आमूलचूल बदलाव के संकेत (historic decision on recruitment) के रूप में देखा जा रहा है:

    • कार्रवाई का दायरा: यह निर्णय किसी एक तात्कालिक पेपर लीक या एक भर्ती विज्ञापन तक सीमित नहीं है।

    • पुरानी प्रक्रियाओं की समीक्षा: सरकार ने वर्ष 2013 से अब तक की पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं को भी जांच के दायरे में खींच लिया है।

       

 

 

 

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