सनातन धर्म में हिंदू नववर्ष बहुत विशेष माना जाता है. हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है. इस दिन से हिंदू नववर्ष भी शुरू हो जाता है. पौराणिक (Hindu Nav Varsh) मान्यता है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से ही ब्रह्मा जी ने संसार की रचना प्रारंभ की थी. इस साल आज से हिंदू नववर्ष शुरू हो गया है.
Hindu Nav Varsh – जब हिंदू नववर्ष शुरू होता है, तो वो दिन जिस ग्रह का होता है, वही ग्रह नववर्ष का राजा होता है. चूंकि आज गुरुवार है और ये दिन बृहस्पति देव को समर्पित है, इसलिए इस हिंदू नववर्ष के राजा गुरु बृहस्पति हैं. वहीं इस साल के मंत्री ग्रहों के सेनापति मंगल हैं. ये नववर्ष विक्रम संवत 2083 है. ये ‘रौद्र संवत्सर’ है. ऐसे में आइए जानते हैं कि ये सवंत्सर कैसा रहेगा?
हिंदू नववर्ष और ‘रौद्र संवत्सर’
हिंदू नववर्ष आज 19 मार्च से शुरू होकर 07 अप्रैल 2027 तक चलेगा. ज्योतिष में ‘रौद्र संवत्सर’ को उग्र और संघर्षपूर्ण माना जाता है. ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि ऐसा समय यानी ये संवत्सर लगभग 60 साल पहले, साल 1966 में भी आया था. इस संवत्सर के दौरान दुनिया की राजनीति में भी हलचल नजर आ सकती है. कुछ बड़े नेताओं का निधन हो सकता है. सत्ता में परिवर्तन संभव है.
इस संवत्सर को लेकर भविष्यवाणी
भारत में भी कुछ बड़े फैसले लिए जा सकते हैं, जोकि नीति और शासन से जुड़े हो सकते हैं. इसके अलावा प्राकृतिक आपदाएं (जैसे बाढ़, भूकंप, असामान्य मौसम) आ सकती हैं. मौसम में अस्थिरता के कारण खेती-किसानी पर प्रभाव पड़ सकता है. इससे महंगाई और आर्थिक उतार-चढ़ाव दिख सकता है. भारत और पाकिस्तान के बीच छोटे स्तर का युद्ध की संभावना है.

