चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुग्राम मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। जनहित और पर्यावरण से जुड़ी इस याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ और अंधाधुंध पेड़ों की कटाई को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कोर्ट ने (high court is strict on cutting trees) ऐतिहासिक टिप्पणी की, “यदि जनता के पास सांस लेने के लिए शुद्ध ऑक्सीजन ही नहीं बचेगी, तो वर्ल्ड बैंक भी आपकी कोई मदद नहीं कर पाएगा।”
high court is strict on cutting trees – दरअसल, यह पूरा मामला गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) द्वारा मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए 489 और पेड़ काटने की नई अनुमति मांगने से जुड़ा है। कंपनी ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए बताया कि इससे पहले परियोजना के लिए करीब 1700 पेड़ों की कटाई की मंजूरी दी जा चुकी है, जिसके बदले में 7300 नए पौधे लगाए गए हैं।
🌳 “जब ट्रैक एलिवेटेड है, तो इतने पेड़ क्यों काट रहे?”
मेट्रो कंपनी ने तर्क दिया कि साइबर सिटी गुरुग्राम में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण और दैनिक ट्रैफिक जाम की विकराल समस्या को देखते हुए यह मेट्रो परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। हालांकि, हाई कोर्ट इस दलील से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। कोर्ट ने तकनीकी सवाल पूछते हुए कहा, “जब मेट्रो का पूरा ट्रैक एलिवेटेड (जमीन से ऊपर पिलर पर) है और पिलर बहुत ही सीमित जगह लेते हैं, तो फिर इस प्रोजेक्ट की आड़ में इतने अधिक पेड़ काटने की जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है?”
