भारत सरकार जिस बैंक को कई सालों से बेचने का प्रयास कर रही थी, अब उसमें काफी अच्छी प्रगति देखने को मिल रही है. सरकार जल्द ही आईडीबीआई बैंक लिमिटेड से अपने मैज्योरिटी स्टेक बेचकर करीब 64 हजार करोड़ रुपए की प्लानिंग कर चुकी है. इसके लिए जल्द ही बोली भी मंगा सकती है. बोली की सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. इस मामले से परिचित लोगों के अनुसार, संभावित दावेदारों के साथ बातचीत एडवांस फेज में है. एक सरकारी एजेंसी द्वारा इस महीने ही औपचारिक रूप से बोली का प्रोसेस शुरू किया जा सकता है. अगर ये ट्रांजेक्शन पूरा होता है तो दशकों के बाद (government has started process) कोई सरकारी बैंक प्राइवेटाइजेशन की ओर मूव करेगा.
भारत सरकार मुंबई स्थित इस बैंक में 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जो आईडीबीआई बैंक के मौजूदा मार्केट वैल्यू पर लगभग 7.1 अरब डॉलर यानी करीब 64 हजार करोड़ रुपए के बराबर है. कभी भारी कर्ज डूबा यह बैंक, हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर सफाई के बाद उभरा है और पूंजीगत सहायता और आक्रामक वसूली से एनपीए में भारी कटौती के बाद प्रॉफिट में लौटा है. रेगुलेटर अनुमोदन प्राप्त करने में देरी जैसी बाधाओं के कारण सरकार बिक्री को पूरा करने की पूर्व निर्धारित समय-सीमा से चूक गई.
government has started process – सूत्रों ने ब्लूबबर्ग की रिपोर्ट में बताया कि कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड, एमिरेट्स एनबीडी पीजेएससी और फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड ने आईडीबीआई बैंक में तथाकथित रुचि-अभिव्यक्ति दिखाई थी और देश के सेंट्रल बैंक द्वारा उन्हें उपयुक्त मानदंडों पर खरा उतरना पड़ा था. रुचि-अभिव्यक्ति बोली प्रक्रिया का पहला चरण है. हालांकि इसके बेच पर फाइनेंशियल बिड नहीं लग सकती है. केंद्र सरकार और पब्लिक सेक्टर की भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के पास इस बैंक में कुल मिलाकर लगभग 95 फीसदी हिस्सेदारी है. सरकार बैंक में अपनी 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि एलआईसी प्रबंधन कंट्रोल ट्रांसफर के साथ 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी.

