नई दिल्ली: भारत में सोने के बदले कर्ज (Gold Loan) का कारोबार अभूतपूर्व तेजी से बढ़ रहा है और अब देश के शीर्ष बिजनेस घराने इस क्षेत्र में आक्रामक रूप से उतर रहे हैं। हाल के हफ्तों में टाटा कैपिटल, गोदरेज कैपिटल और आदित्य बिड़ला कैपिटल ने गोल्ड लोन सेक्टर में बड़े निवेश और विस्तार की योजनाएं बनाई हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि गोल्ड लोन अब केवल छोटे साहूकारों या कुछ सीमित NBFCs का कारोबार नहीं रहा, बल्कि बड़े कॉरपोरेट समूह इसे भविष्य के सबसे सुरक्षित और टिकाऊ रिटेल लैंडिंग बिजनेस के तौर पर देख रहे हैं।

 बड़े समूहों की रणनीतिक चाल: किसी ने किया अधिग्रहण, कोई खोलेगा 1,000 नई ब्रांच

टाटा कैपिटल ने केरल स्थित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी ‘योगलोन्स’ (Yogloans) में 88.6% हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है। इसके जरिए कंपनी को 160 से अधिक शाखाएं, लगभग 32,000 सक्रिय ग्राहक और ₹700 करोड़ से अधिक का तैयार गोल्ड लोन पोर्टफोलियो मिला है। गोदरेज ने कनकादुर्गा फाइनेंस के गोल्ड लोन कारोबार का अधिग्रहण किया है, जिसके साथ कंपनी के पास ₹280 करोड़ का पोर्टफोलियो, 54 ब्रांच और 12,000 ग्राहक जुड़े हैं.

गोल्ड लोन सेक्टर में क्यों बढ़ रही है कंपनियों की दिलचस्पी?

भारतीय परिवारों के पास दुनिया में सबसे बड़ा सोने का निजी भंडार मौजूद है। सोने के (Gold Loan) आभूषणों के एवज में दिए गए ऋण का कुल बकाया ₹3.3 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है और वित्त वर्ष में इसमें करीब 50% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। बैंक और NBFCs के लिए यह पूरी तरह सुरक्षित ऋण है। डिफॉल्ट की स्थिति में नियमों के तहत गिरवी रखे सोने की नीलामी करके पूंजी की सुरक्षित वसूली की जा सकती है।  होम लोन या बिजनेस लोन की तुलना में गोल्ड लोन में न्यूनतम दस्तावे की जरूरत होती है और तुरंत वितरण हो जाता है।

 

 

 

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