शिवपुरी (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के हातोद गांव में पिछले कई महीनों से ग्रामीणों के लिए खौफ का पर्याय बने दो तेंदुए के शावकों का आखिरकार सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया है।
दिलचस्प बात यह रही कि जहां वन विभाग की प्रशासनिक रणनीति और अत्याधुनिक रेस्क्यू पिंजरा लगातार चार दिनों तक पूरी तरह नाकाम साबित हुआ, वहीं स्थानीय ग्रामीणों की एक व्यावहारिक देसी तरकीब ने कमाल कर दिखाया। चार दिनों तक पिंजरे में कुत्ते को शिकार (चारे) के रूप में रखने के उपरांत भी तेंदुए पास तक नहीं फटके, परंतु जैसे ही ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर बकरा पिंजरे में बांधा, अगले ही दिन दोनों शावक उसमें कैद मिले।
🐕 कुत्ते के शिकार से नहीं फंसा पासा, 4 दिनों तक खाली पड़ा रहा वन विभाग का पिंजरा
सामान्य वन मंडल की शिवपुरी रेंज अंतर्गत हातोद गांव के आसपास एक मादा तेंदुआ अपने शावकों के साथ लंबे समय से सक्रिय थी।
तेंदुए लगातार गांव के पालतू मवेशियों, बकरियों और कुत्तों को अपना शिकार बना रहे थे, जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत व्याप्त थी। ग्रामीणों की निरंतर शिकायतों के उपरांत वन विभाग ने 2 अगस्त को टाइगर रिजर्व से विशेष रेस्क्यू पिंजरा मंगवाकर गांव के समीप स्थापित किया। प्रारंभ में वन विभाग ने पिंजरे के भीतर कुत्ते को चारे के रूप में बांधा, किंतु शावक इतने चतुर निकले कि लगातार चार दिनों तक पिंजरे के आसपास भी नहीं भटके।
🐐 ग्रामीणों ने आपस में जुटाया चंदा, बकरा बांधते ही 24 घंटे के भीतर मिली ऐतिहासिक सफलता
वन विभाग की पूर्व रणनीति को असफल होते देख गांव के लोगों ने अपनी एक स्थानीय तरकीब सुझाई।
ग्रामीणों ने आपस में चंदा जमा करके एक बकरा खरीदा और उसे पिंजरे में बांधने का प्रस्ताव रखा। वन विभाग की सहमति के उपरांत बकरे को पिंजरे में रखा गया। इसके पश्चात जो परिणाम सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया। 6 अगस्त की प्रातः जब वन विभाग और ग्रामीणों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची, तो दोनों तेंदुआ शावक पिंजरे के भीतर सुरक्षित कैद मिले। इस सफलता के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
🌲 सतनवाड़ा के सुरक्षित जंगल में छोड़े गए शावक, मादा तेंदुआ की तलाश में गश्त जारी
सफल रेस्क्यू के उपरांत टाइगर रिजर्व की टीम की सहायता से दोनों शावकों को सतनवाड़ा रेंज के सुरक्षित घने जंगल में सकुशल छोड़ दिया गया है।
तथापि, वन विभाग का अनुमान है कि संबंधित क्षेत्र में अभी भी मादा तेंदुआ और एक अन्य शावक मौजूद हो सकता है। इसी दृष्टिगत क्षेत्र में लगातार कॉम्बिंग व गश्त की जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक पूरे क्षेत्र को तेंदुए के खतरे से पूरी तरह मुक्त नहीं करा लिया जाता, तब तक वन विभाग की निगरानी निरंतर जारी रहनी चाहिए।


