नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली और ऐतिहासिक लाल किले के प्रांगण पर आगामी 24 मई को आदिवासी समाज का एक अभूतपूर्व महासैलाब जुटने जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े वनवासी कल्याण आश्रम के बैनर तले आयोजित होने वाले इस ‘जनजातीय सामाजिक समागम’ में देशभर से एक लाख से अधिक (Delhi Tribal Samagam) आदिवासियों के शामिल होने का दावा किया गया है। सुदूर वनांचल क्षेत्रों से आदिवासी समुदाय के लोगों का दिल्ली पहुंचना भी शुरू हो चुका है।
हालांकि, आयोजक इसे विशुद्ध रूप से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे साल 2027 के विभिन्न राज्यों के विधानसभा और 2029 के आगामी लोकसभा चुनावों से पहले देश के विशाल आदिवासी वोट बैंक में गहरी पैठ बनाने और उन्हें वैचारिक रूप से लामबंद करने की एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
Delhi Tribal Samagam – इस विशाल और ऐतिहासिक आयोजन की पूरी रूपरेखा आरएसएस से जुड़े वनवासी कल्याण आश्रम और जनजाति सुरक्षा मंच ने मिलकर तैयार की है। आयोजकों की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, करीब एक लाख लोग इस समागम का हिस्सा बनेंगे, जिनमें से लगभग 75 हजार लोग देश के विभिन्न कोनों से विशेष ट्रेनों के जरिए दिल्ली पहुंच रहे हैं।
🏹 भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर भव्य समागम
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के पावन अवसर पर आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग दिल्ली के पांच अलग-अलग चिन्हित विशाल शिविरों में ठहराए गए हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, इन पांचों केंद्रों से आदिवासी समाज के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्यों, तीरों-कमानों और अद्भुत लोक संस्कृति के साथ भव्य शोभायात्रा निकालते हुए सामूहिक रूप से लाल किला मैदान पहुंचेंगे।
🗣️ समागम में कौन-कौन से संवेदनशील मुद्दे उठाए जाएंगे
वनवासी कल्याण आश्रम के इस राष्ट्रीय समागम में केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं होंगी, बल्कि जनजातीय समाज से जुड़े कई बेहद संवेदनशील और ज्वलंत मुद्दों को भी प्रखरता से उठाने की तैयारी है। इनमें से कुछ मुख्य विषय निम्नलिखित हैं:
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धर्मांतरण और डी-लिस्टिंग (De-listing): समागम का सबसे बड़ा मुद्दा देश में चल रहा अवैध धर्मांतरण और डी-लिस्टिंग का है। आयोजकों का सीधा आरोप है कि जो आदिवासी धर्म परिवर्तन कर चुके हैं, वे अब भी अनुचित रूप से मूल आदिवासियों के कोटे से अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण का दोहरा लाभ ले रहे हैं, जिससे वनांचल में रहने वाला मूल सनातनी जनजातीय समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। मांग की जाएगी कि धर्म बदलने वालों को एसटी सूची से बाहर (डी-लिस्ट) किया जाए।
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फर्जी ST सर्टिफिकेट की बाढ़: देश के विभिन्न राज्यों में गैर-आदिवासियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनवाए जा रहे एसटी सर्टिफिकेट और उसके जरिए हासिल की जा रही सरकारी नौकरियों व जमीनों के घपले पर भी कड़ा विरोध जताया जाएगा।
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लव जिहाद और लैंड जिहाद: जनजातीय बहुल इलाकों में तथाकथित लव जिहाद और सोची-समझी रणनीति के तहत आदिवासियों की जमीनों पर किए जा रहे अवैध कब्जों (लैंड जिहाद) के खिलाफ मंच से हुंकार भरी जाएगी। आयोजकों का सीधा आरोप है कि कुछ विदेशी ताकतें और मिशनरी संगठन देश के (Delhi Tribal Samagam) भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाकर उनकी मूल सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और जड़ों से अलग करने की गहरी साजिश रच रहे हैं।
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