नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले के अंतर्गत आने वाले सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक दिल दहला देने वाला बड़ा हादसा सामने आया है।
यहां स्थित एक पांच मंजिला रिहायशी इमारत अचानक भरभराकर जमींदोज हो गई। इमारत गिरते ही चारों तरफ धूल का गुबार छा गया और इलाके में चीख-पुकार व भगदड़ मच गई। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इमारत के विशाल मलबे के नीचे कई लोग फंसे हो सकते हैं।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और दिल्ली पुलिस की टीमें हरकत में आईं। राहत और बचाव कार्य के लिए दमकल की 12 गाड़ियां और विशेष बचाव दल मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।
🚒 दोपहर 1:30 बजे मिली सूचना: राहत-बचाव में जुटी दमकल की 12 टीमें
सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ प्रशासनिक तंत्र:
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कॉल मिलते ही दौड़े राहत दल: दिल्ली फायर सर्विस के अनुसार, रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन क्षेत्र में इमारत गिरने की इमरजेंसी कॉल प्राप्त हुई थी।
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12 टीमें तैनात: कॉल के तुरंत बाद विभिन्न फायर स्टेशनों से दमकल की 12 गाड़ियों को जीवनरक्षक उपकरणों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।
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मलबे से सुरक्षित निकालने की जद्दोजहद: राहतकर्मी मलबे की कंक्रीट स्लैब को कटर और क्रेन की मदद से हटाने में जुटे हैं, ताकि नीचे फंसे संभावित लोगों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
🏨 इमारत में संचालित होता था हॉस्टल: छात्रों के फंसे होने की गहरी आशंका
साउथ कैंपस के निकट होने से परिजनों में दहशत:
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हॉस्टल संचालन की बात: स्थानीय लोगों के अनुसार, धराशायी हुई इस इमारत में छात्रों के लिए हॉस्टल संचालित किया जा रहा था। इस कारण मलबे में विद्यार्थियों के दबे होने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
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संख्या की आधिकारिक पुष्टि बाकी: हादसे के समय इमारत और कमरों के भीतर कुल कितने छात्र अथवा अन्य लोग मौजूद थे, इसकी प्रशासनिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
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डीयू साउथ कैंपस से सटा क्षेत्र: सत्य निकेतन इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के साउथ कैंपस से बिल्कुल सटा हुआ है, जहां हजारों छात्र पेइंग गेस्ट (PG) और निजी हॉस्टलों में रहकर पढ़ाई करते हैं। इमारत गिरने की खबर के बाद छात्र समुदाय और उनके परिजनों में भारी चिंता और डर का माहौल है।
🌧️ लगातार बारिश के बीच एहतियात: आसपास की इमारतों को कराया गया खाली
सुरक्षा उपाय और जांच का दायरा:
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आसपास के मकान खाली कराए: हादसे के तुरंत बाद एहतियातन ढही हुई इमारत से सटी आसपास की कई अन्य इमारतों को भी खाली करा लिया गया है, ताकि किसी अन्य खतरे से बचा जा सके।
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बारिश से कमजोर ढांचे पर नजर: दिल्ली में पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण पुरानी और कमजोर इमारतों के स्ट्रक्चर को लेकर प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
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इमरजेंसी सेवाएं अलर्ट पर: घटनास्थल पर कई एंबुलेंस, कैट्स (CATS) वाहन और पैरामेडिकल स्टाफ तैनात हैं, ताकि मलबे से निकाले जाने वाले घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में प्राथमिक उपचार मिल सके। हादसे के वास्तविक कारणों की विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है।


