Surya Grahan: सूर्य ग्रहण धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना जाता है, लेकिन खगोल विज्ञान के अनुसाार, ये एक दुर्लभ घटना मानी जाती है. चंद्रमा के पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाने पर जब सूर्य की किरणें धरती तक नहीं पहुंच पाती व धरती पर चंद्रमा की छाया पड़ती है, तो उस स्थिति में ये माना जाता है कि सूर्य को ग्रहण लगा हुआ है. सूर्य ग्रहण की खगोलीय घटना हमेशा अमावस्या के दिन ही घटती है.

साल 2026 में 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण की एक घटना घटित हो चुकी है. इस साल (Surya Grahan) दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने वाला है, लेकिन खगोलविदों और ज्योतिषविदों की निगाहें साल 2027 पर टिकी हुई हैं. साल 2027 सदी की सबसे खास और दुर्लभ घटनाओं का गवाह बनेगा. इस साल सूर्य को सदी का दूसरा सबसे लंबा ग्रहण लगेगा.

दिन मेंं रात की तरह अंधेरा हो जाएगा

साल 2027 में लगने वाला सदी का ये दूसरा सबसे लंबा सूर्य ग्रहण 27 अगस्त को लगेगा. उस दिन सूर्य चंद्रमा के द्वारा करीब 6 मिनट 22 सेकंड तक पूरी तरह ढक लिया जाएगा. जब ऐसा होगा तो दिन में रात की तरह अंधेरा छा जाएगा. इतनी लंबी अवधि का ऐसा नजारा फिर 2114 में ही देखने को मिलेगा. यही कारण है कि इस सूर्य ग्रहण को बहुत विशेष खगोलीय घटना माना जा रहा है.

क्या भारत में दिखेगा इस सूर्य ग्रहण का नाजारा?

ये सूर्य ग्रहण भारत में पूर्ण नहीं, बल्कि आंशिक रूप से यानी थोड़ा सा ही दिखेगा. वहीं यह ग्रहण मुख्य रूप से स्पेन, मिस्र, सऊदी अरब, लीबिया, ट्यूनिशिया, यमन, मोरक्को, सूडान, सोमालिया, अल्जीरिया और जिब्राल्टर जैसे 11 देशों में पूरी तरह से दिखेगा.

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