दतिया : मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए हाई-प्रोफाइल उपचुनाव के नतीजों की चर्चा पूरे प्रदेश और देश के राजनीतिक गलियारों में हो रही है। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को करारी शिकस्त देते हुए अपनी इस सीट पर कब्जा बरकरार रखा है। भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के स्थान पर (Datia by election result) आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा था, जबकि कांग्रेस ने अपने अनुभवी नेता घनश्याम सिंह पर दांव खेला था। मतगणना की शुरुआत से ही घनश्याम सिंह लगातार बढ़त बनाए रहे और अंततः उन्होंने 6,016 मतों के अंतर से शानदार जीत हासिल की।
1993 से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
घनश्याम सिंह के राजनीतिक सफर की बात करें तो यह काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे (Datia by election result) दतिया से दो बार और सेवढ़ा से एक बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं।
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1993: पहली बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की।
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1998: चुनावी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा।
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2003: वापसी करते हुए एक बार फिर दतिया से विधायक चुने गए।
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2008 व 2013: 2008 में भाजपा उम्मीदवार नरोत्तम मिश्रा तथा 2013 में भाजपा के प्रदीप अग्रवाल से चुनाव हारे।
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2018: पाला बदलते हुए सेवढ़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और भाजपा के राधेलाल बघेल को हराकर विधायक बने।
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2023: 2023 के विधानसभा चुनाव में सेवढ़ा से वे भाजपा प्रत्याशी प्रदीप अग्रवाल से चुनाव हार गए थे।
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हार के बाद भी पार्टी संगठन को किया मजबूत
चुनावी उतार-चढ़ाव के बावजूद घनश्याम सिंह ने क्षेत्र में अपनी सक्रियता कभी कम नहीं होने दी। उन्होंने लगातार संगठन और आम जनता के बीच उपस्थिति बनाए रखी। उनकी राजनीतिक सक्रियता केवल दतिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि सेवढ़ा विधानसभा क्षेत्र में भी उन्होंने लंबे समय तक कार्य किया और वहां से जीत भी हासिल की। दोनों ही क्षेत्रों में आज भी उनका नाम प्रभावशाली नेताओं की सूची में अग्रगण्य है।


