भोपाल : देश के 3 राज्यों की 3 विधानसभा सीटों पर संपन्न हुए उपचुनावों के परिणाम अत्यंत अप्रत्याशित और चौंकाने वाले रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को इन 3 में से 2 महत्वपूर्ण सीटों पर पराजय का स्वाद चखना पड़ा है। बिहार की प्रतिष्ठित बांकीपुर सीट पर जहां भाजपा को 1995 के बाद पहली बार हार मिली है, वहीं (BJP leadership shocked by crushing defeat) मध्य प्रदेश की अनुकूल मानी जा रही दतिया सीट भी पार्टी के हाथ से निकल गई है। दतिया उपचुनाव में मिली इस अप्रत्याशित हार के बाद पार्टी अब पराजय के कारणों की गहराई से जांच में जुट गई है।
भितरघात और अनुशासनहीनता के आरोपों की होगी गहन जांच
दतिया उपचुनाव के परिणामों ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को स्तब्ध कर दिया है। पार्टी को जहां दतिया शहर में अब तक की सबसे बड़ी चुनावी हार का सामना करना पड़ा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा प्रत्याशी कांग्रेस से 5,215 वोटों की बढ़त बनाने में सफल रहा। इसके बावजूद कुल मतों के आधार पर यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। चुनावी नतीजे आने के उपरांत अब भाजपा बूथ प्रबंधन, जमीनी रणनीति, स्थानीय संगठन की निष्क्रियता और प्रचार अभियान की त्रुटियों की बारीकी से पड़ताल करेगी।
“जनता का जनादेश सर्वोपरि”: मुख्यमंत्री
उपचुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि है और भारतीय जनता पार्टी उसका पूरा सम्मान करती है। उन्होंने रेखांकित किया कि (BJP leadership shocked by crushing defeat) भले ही कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल रही, किंतु भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में अपने वोट प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि की है।


