अमेरिकी कांग्रेस से जुड़े अहम आयोग यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की ताजा रिपोर्ट में चीन और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को लेकर बड़े खुलासे किए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने हाल के समय में ईरान को आक्रामक ड्रोन और रॉकेट ईंधन बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल उपलब्ध कराया है. इसमें खास तौर पर सोडियम पर्क्लोरेट शामिल है, जो मिसाइलों के ठोस ईंधन का अहम घटक माना जाता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2026 की शुरुआत में ईरान के दो सरकारी जहाज चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए, जिनमें इस रॉकेट ईंधन से जुड़ा सामग्री होने की आशंका है. इससे पहले जनवरी 2025 में भी चीन करीब 1000 टन सोडियम पर्क्लोरेट ईरान भेज चुका है. सबसे अहम दावा यह है कि ईरान अब चीन के सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम BeiDou Navigation Satellite System का इस्तेमाल कर सकता है. 

ईरान के साथ हथियारों की डील में शामिल था चीन

रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में चीन ने ईरान को इस सिस्टम की पूरी सैन्य पहुंच दी थी, जिससे ईरान अपने ड्रोन और मिसाइल हमलों को और सटीक बना सकता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़रायल के हमलों से ठीक पहले चीन, ईरान के साथ हथियारों की सीधी डील में शामिल था.

अब बदलता दिख रहा है चीन का रुख

इसमें एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइल बेचने की लगभग पूरी तैयारी हो चुकी थी, हालांकि डिलीवरी की तारीख तय नहीं हो पाई थी. चीन ने लंबे समय तक ईरान को सीधे हथियार देने से दूरी बनाए रखी थी. खासकर 2015 में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के बाद लेकिन अब चीन का रुख बदलता दिख रहा है और वह कम प्रतिबंधित तरीके से ईरान को सैन्य तकनीक और क्षमताएं दे रहा है.

दोनों देश ऐसे मजबूत कर रहे सैन्य साझेदारी

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दोनों देश शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) और BRICS जैसे मंचों के जरिए अपनी सैन्य साझेदारी को और मजबूत कर रहे हैं. दिसंबर 2025 में ईरान ने SCO का संयुक्त सैन्य अभ्यास भी आयोजित किया था. यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान की सैन्य क्षमताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता भी तेज हो गई है.

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