बेंगलुरु : कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपनी धार्मिक पहचान और शपथ ग्रहण के दौरान निभाई गई परंपराओं पर उठ रहे सवालों का मजबूती से जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन (D K Shivakumar on Faith) ईश्वर और व्यक्ति के बीच का संबंध सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “मैं अपना हिंदू धर्म न तो त्याग सकता हूं और न ही अपनी पहचान को दरकिनार कर सकता हूं। शपथ के दौरान धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करना मेरा निजी विश्वास है, इसे राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।”
🤝 ‘सर्वधर्म समभाव मेरी पहचान’
मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि उनकी आस्था का मतलब किसी अन्य धर्म का अपमान नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं ईसाई, सिख, बौद्ध और हिंदू—सभी धर्मों की संस्थाओं का समान रूप से आदर करता हूं। राज्य की बागडोर संभालने से पहले मैंने सभी धर्मगुरुओं का आशीर्वाद लिया है। धर्म हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा है और कोई भी व्यक्ति अपनी जड़ों से आसानी से अलग नहीं हो सकता।”
🏗️ मल्लघट्टा में 35 करोड़ की परियोजनाओं का वादा
धार्मिक विषयों के साथ ही डी.के. शिवकुमार ने राज्य के विकास पर अपना फोकस साफ रखा। उन्होंने मल्लघट्टा क्षेत्र में लगभग 35 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने बताया (D K Shivakumar on Faith) कि स्थानीय प्रतिनिधियों और कडु सिद्धेश्वर मठ के अधिकारियों के साथ बैठक कर क्षेत्र के समग्र विकास पर चर्चा की गई है। शिवकुमार ने कहा कि सरकार हर क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


