अमरावती: देश के तटीय इलाकों में चक्रवात ‘अर्नब’ ने भारी तबाही मचाई है, जिसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश के विभिन्न जिलों में व्यापक नुकसान देखने को मिला है। राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश के कारण जगह-जगह पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए हैं, सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और कई क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस चक्रवाती तूफान के चलते आंध्र प्रदेश में तीन लोगों की असामयिक मौत हो गई है और लगभग 31 मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। संभावित खतरे और बड़े पैमाने पर नुकसान को भांपते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर करीब 57 हजार लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचा दिया है। हालांकि, तट पार करने के बाद यह चक्रवात अब काफी हद तक कमजोर पड़ गया है, लेकिन इसके असर से कई इलाकों में रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला अभी भी जारी है।
आंध्र प्रदेश और यनम के तट से टकराने के बाद कमजोर पड़ा चक्रवात
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट के मुताबिक, चक्रवात अर्नब मंगलवार की देर रात से बुधवार सुबह के दरमियान आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के यनम क्षेत्र के तटीय हिस्सों से होकर गुजरा। तट को पार करने के बाद यह अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान से कमजोर होकर एक सामान्य भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस तूफान का मुख्य केंद्र यनम के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में स्थित था, जो नरसापुर से लगभग 20 किलोमीटर पूर्व-उत्तर पूर्व, यनम से 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और काकीनाडा से करीब 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम की दूरी पर तट को पार कर आगे बढ़ा। अनुमान जताया गया है कि यह चक्रवात धीरे-धीरे और अधिक कमजोर होकर पहले एक चक्रवाती तूफान और फिर गहरे दबाव (Deep Depression) के क्षेत्र में बदल जाएगा। हालांकि, इसके परोक्ष प्रभाव के कारण आंध्र प्रदेश और पड़ोसी राज्य ओडिशा के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भी बारिश का दौर जारी रहने की पूरी आशंका है।
करंट की चपेट में आने से हुई मौतें, एनडीआरएफ ने की पुष्टि
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के महानिरीक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य आंध्र प्रदेश रहा है, जहां से तीन लोगों की मौत की दुखद सूचना मिली है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में हवा के तेज झोंकों से पेड़ धराशायी हो गए हैं और दर्जनों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। राज्य में सामने आए हादसों के मुताबिक, करंट की चपेट में आने से दो लोगों की जान चली गई है। विशाखापत्तनम जिले में मंगलवार की रात एक 53 वर्षीय व्यक्ति खेत में पानी निकालने के लिए बनी नाली के समीप टूटे हुए बिजली के एक लाइव तार की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दूसरी घटना में, अनकापल्ली जिले के येल्लमंचिली शहर के भीतर बुधवार की सुबह एक 55 वर्षीय महिला की खुले बिजली के तार पर गलती से पैर पड़ जाने के कारण करंट लगने से मौत हो गई। एनडीआरएफ की शुरुआती रिपोर्ट में कुल तीन मौतों का जिक्र किया गया है, जबकि आंध्र प्रदेश से प्राप्त विस्तृत प्रशासनिक रिपोर्ट में करंट से हुई इन दो मौतों का विशेष उल्लेख मिलता है।
तटीय जिलों में उखड़े सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे, यातायात और बिजली आपूर्ति ठप
इस चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला है, जहां हवा की तेज रफ्तार के चलते सैकड़ों की संख्या में पेड़ और बिजली के खंभे जमीन पर आ गिरे। इसकी वजह से प्रमुख सड़कों पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया और कई इलाकों में विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। काकीनाडा जिले के पुलिस अधीक्षक जी. बिंदु माधव ने बताया कि उनके जिले में लगभग 100 बिजली के खंभे और कई बड़े पेड़ गिर गए हैं। तेज हवाओं के दबाव के कारण समुद्र तट के किनारे बनी प्रसिद्ध उप्पाडा सड़क भी पूरी तरह से बह गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि जिले में बारिश की मात्रा कुछ कम हुई थी, लेकिन तूफानी हवाओं ने बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचाई है। उधर, विशाखापत्तनम जिले में लगभग 400 पेड़ों के उखड़ने की जानकारी सामने आई है, जहां सड़क एवं भवन विभाग तथा ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर निगम की विशेष टीमें युद्धस्तर पर सड़कों से मलबे और पेड़ों को हटाने के काम में जुटी हुई हैं। अधिकारियों के अनुसार अधिकांश मार्गों पर यातायात को सुचारू कर दिया गया है, जबकि शेष स्थानों पर साफ-सफाई का कार्य तेजी से चल रहा है। कोनासीमा जिले में भी इसी प्रकार के नुकसान की खबर है, जहां आपूर्ति बहाल करने के लिए टीमें तैनात हैं।
कई इलाकों में 200 मिलीमीटर से अधिक रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज
चक्रवात के व्यापक प्रभाव के चलते आंध्र प्रदेश के कई जिलों में बादलों ने जमकर कहर बरपाया और अति-भारी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अनकापल्ली, विजयनगरम और विशाखापत्तनम जिलों के कुछ विशेष क्षेत्रों में 200 मिलीमीटर से भी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसमें अनकापल्ली के कन्नूरीपालेम में सबसे अधिक 261.5 मिलीमीटर की भारी बारिश दर्ज की गई, जबकि विजयनगरम जिले के केवीबीआर स्कूल क्षेत्र में 259.74 मिलीमीटर और विशाखापत्तनम की 16वीं पुलिस बटालियन के इलाके में 259.06 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इसके अलावा अल्लूरी सीतारामराजू जिले में लगातार हो रही बरसात के कारण जलस्तर बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। यहाँ अनंतगिरि मंडल के ताडीगुडा गांव में एक पुराना पुल पानी के तेज बहाव में बह गया, जिससे एक पूरी बस्ती का संपर्क बाकी इलाकों से कट गया है। प्रशासन ने इस संपर्क को दोबारा जोड़ने के लिए युद्धस्तर पर वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था और मरम्मत का काम शुरू कर दिया है।
प्रशासन की मुस्तैदी से 57 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया गया
तूफान के संभावित विकराल रूप को देखते हुए राज्य प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाया। एनडीआरएफ के महानिरीक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि अकेले आंध्र प्रदेश में लगभग 57 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों से निकालकर राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है। इसके अतिरिक्त, मंगलवार की रात को ही यनम क्षेत्र से 38 लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया था। कोनासीमा जिले के निचले और संवेदनशील इलाकों से 10 हजार से अधिक नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की सूचना दी गई है, जहाँ जिला प्रशासन द्वारा लगभग 495 चक्रवात राहत शिविर और अस्थायी केंद्र बनाए गए हैं। विशाखापत्तनम में भी कुछ परिवार इन राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं, जबकि हालात सामान्य होने पर कई लोग अपने घरों की ओर वापस लौटने लगे हैं। केंद्र सरकार के साथ-साथ आंध्र प्रदेश और ओडिशा की तमाम राहत एवं बचाव एजेंसियां समन्वय बनाकर काम कर रही हैं। वर्तमान में आंध्र प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में एनडीआरएफ की कुल 39 टीमें तैनात की गई हैं, और स्थिति से निपटने के लिए मंगलवार रात आंध्र प्रदेश में चार अतिरिक्त टीमें भी भेजी गई थीं।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने की उच्चस्तरीय समीक्षा, दो घंटे में सड़कें साफ करने के दिए निर्देश
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार की सुबह वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें चक्रवात से हुए नुकसान और चलाए जा रहे राहत कार्यों की गहन समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन को जल्द से जल्द सामान्य बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में आदेश दिया कि आंधी-तूफान के कारण गिरे पेड़ों की वजह से बंद पड़ी सड़कों को हर हाल में दो घंटे के भीतर साफ किया जाए और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात में बाधा बन रहे पेड़ों को तुरंत हटाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने हवा की गति थमते ही बिजली आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बहाल करने पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री नायडू ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सहायता की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। इसके अलावा खेतों में अत्यधिक जलभराव रोकने, बागवानी फसलों का बचाव करने तथा तालाबों और नहरों के तटबंधों को सुरक्षित रखने के लिए फौरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने फसलों को हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन जल्द तैयार करने और एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ की टीमों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा है।
ओडिशा में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं, प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस चक्रवात का सबसे अधिक प्रभाव आंध्र प्रदेश के उत्तरी हिस्सों और ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों पर देखा गया है। इन दोनों राज्यों के कुछ सीमावर्ती जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार पड़ोसी राज्य ओडिशा में किसी भी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि चक्रवात के बचे-कुचे प्रभाव के चलते बुधवार और बृहस्पतिवार को भी आंध्र प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह से सतर्क रहने और राहत एवं बचाव कार्यों को बिना किसी ढिलाई के जारी रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।


