रांची (झारखंड): झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ मुठभेड़ हो या उनकी गिरफ्तारी, इन तमाम अभियानों में सीआरपीएफ की 209 कोबरा बटालियन का हमेशा सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

भाकपा माओवादियों के अंतिम पोलित ब्यूरो सदस्य और 2 करोड़ 20 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी में भी कोबरा जवानों की सबसे अहम भूमिका रही। कोबरा बटालियन की इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद गुरुवार को खुद सीआरपीएफ के महानिदेशक (DG) जीपी सिंह रांची पहुंचे और जांबाज जवानों को सम्मानित किया।

🎖️ रांची ग्रुप सेंटर में 209 कोबरा बटालियन के जवानों को किया सम्मानित, बढ़ाया कमांडोज का हौसला

झारखंड दौरे पर पहुंचे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के डीजी जीपी सिंह ने गुरुवार को रांची स्थित ग्रुप सेंटर में 209 कोबरा बटालियन के उन बहादुर जवानों से व्यक्तिगत मुलाकात की।

इन जवानों ने झारखंड पुलिस के साथ मिलकर चलाए गए संयुक्त अभियान के तहत भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य मिसिर बेसरा को धर दबोचा था। डीजी ने इस साहसिक अभियान में शामिल अधिकारियों और जवानों को सम्मानित करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। मिसिर बेसरा जैसे कुख्यात और शीर्ष माओवादी नेता की गिरफ्तारी को देश के नक्सल विरोधी अभियान की अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है।

🤝 सम्मान समारोह में झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे भी हुए शामिल, कमजोर हुआ नक्सली नेटवर्क

सीआरपीएफ डीजी द्वारा आयोजित इस विशेष सम्मान समारोह में झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे सहित राज्य पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मिसिर बेसरा लंबे समय से देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शीर्ष पर शामिल था। उसकी गिरफ्तारी से झारखंड समेत पूरे पूर्वी भारत में माओवादियों और नक्सलियों के नेटवर्क की रीढ़ टूट गई है और यह नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

🍲 209 कोबरा बटालियन के जवानों के साथ ‘बड़ाखाना’ में शामिल हुए सीआरपीएफ डीजी

जवानों को सम्मानित करने के बाद सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह ने 209 कोबरा बटालियन के कमांडोज के साथ पारंपरिक ‘बड़ाखाना’ (सामूहिक भोज) में हिस्सा लिया।

इस दौरान उन्होंने जंगल युद्ध में पारंगत कोबरा जवानों के साथ बैठकर भोजन किया, उनसे अनौपचारिक बातें कीं और उनके अदम्य साहस की सराहना की। सीआरपीएफ द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, डीजी का यह कार्यक्रम जवानों का मनोबल बढ़ाने और अधिकारियों व जवानों के बीच आपसी भाईचारे तथा टीम भावना को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल रही।

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