संभल (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के संभल जिले में बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने के ऐलान को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित एवं सख्त कार्रवाई करते हुए तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी के खिलाफ विधिक कदम उठाए हैं। क्षेत्र में शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका के दृष्टिगत उप-जिलाधिकारी (SDM) कोर्ट ने दोनों को आगामी छह महीने की अवधि के लिए 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर पाबंद कर दिया है और आधिकारिक नोटिस जारी कर तलब किया।

📜 SDM कोर्ट ने भेजा कारण बताओ नोटिस, तमन्ना बोलीं—”यह मेरी व्यक्तिगत आस्था का विषय”

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, तमन्ना मलिक ने सार्वजनिक रूप से बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा में भाग लेने की बात कही थी, जिसके बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने स्वतः संज्ञान लिया।

SDM कोर्ट द्वारा जारी नोटिस में पूछा गया कि वे बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा में क्यों शामिल होना चाहती हैं और इससे सामाजिक सौहार्द पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। नोटिस मिलने के उपरांत तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी अपने अधिवक्ताओं के साथ एसडीएम कार्यालय उपस्थित हुए और अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

💬 “तमन्ना साड़ी पहनें या बुर्का, यह उनका अधिकार”: पति अमन त्यागी ने रखा अपना पक्ष

अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अमन त्यागी ने कहा कि कांवड़ यात्रा पूरी तरह से व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक विश्वास का विषय है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी पत्नी तमन्ना के साथ यात्रा में अवश्य शामिल होंगे। अमन त्यागी ने तर्क दिया कि उनकी पत्नी बुर्का पहनें या पारंपरिक साड़ी, यह उनका निजी निर्णय है और इसमें किसी को अनुचित हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि तमन्ना ने स्वेच्छा से सनातन धर्म को अंगीकार किया है और उन्हें अपनी धार्मिक भावनाएं व्यक्त करने का पूर्ण अधिकार है।

🛡️ “धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक नहीं, कानून-व्यवस्था प्राथमिकता”: एसडीएम विकास चंद्र

दूसरी ओर, संभल जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का ध्येय किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत अथवा धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाना नहीं है, अपितु जिले में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

एसडीएम विकास चंद्र ने आधिकारिक बयान में बताया कि एहतियात के तौर पर शांति भंग की संभावना के तहत नियमानुसार कार्रवाई की गई है। दोनों पक्षों को सुनकर उनका पक्ष दर्ज कर लिया गया है। प्रशासन संपूर्ण स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि सावन मास में कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न घटित हो।

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