नई दिल्ली: विवेक विहार स्थित श्री हनुमान बालाजी मंदिर में आयोजित रामलीला का समापन दशहरा पर्व पर धार्मिक उत्साह के साथ हुआ। सनातनी विनोद कुमार बिंदल के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम के अंतिम दिन रावण वध और भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का मंचन किया गया। रामलीला के समापन पर भगवान श्रीराम के जयकारों के साथ बुराई पर (story of Ramayana) अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया।

11 अक्टूबर से शुरू हुए इस आयोजन में रामायण के अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों को मंचीय रूप दिया गया। भगवान श्रीराम के जन्म, विश्वामित्र के साथ वन प्रस्थान, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और सीता स्वयंवर जैसे दृश्यों से रामकथा की शुरुआत हुई। इसके बाद सीता-राम विवाह और लक्ष्मण-परशुराम संवाद के माध्यम से भगवान श्रीराम के शौर्य, धैर्य और मर्यादित आचरण को प्रस्तुत किया गया।

राम वनगमन, केवट संवाद, भरत मिलाप और शबरी भेंट जैसे प्रसंगों ने पारिवारिक संबंधों, त्याग और भक्ति की भावना को उजागर किया। कथा आगे बढ़ने पर पंचवटी, सीता हरण और जटायु वध के दृश्य प्रस्तुत किए गए। राम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध के बाद हनुमान जी के लंका पहुंचने की घटनाओं ने रामायण के संघर्षपूर्ण अध्याय को आगे बढ़ाया।

लंका से जुड़े प्रसंगों में अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट, लंका दहन, विभीषण की शरणागति और रामसेतु निर्माण को शामिल किया गया। युद्ध के दौरान कुंभकर्ण, मेघनाद और अहिरावण वध के दृश्यों के जरिए भगवान श्रीराम की सेना और रावण के बीच संघर्ष को दर्शाया गया। इन प्रस्तुतियों ने दशहरा के मुख्य प्रसंग रावण वध की भूमिका तैयार की।

story of Ramayana
अंतिम दिन रावण वध के बाद भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का मंचन कर रामलीला को विराम दिया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि अहंकार और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है। सनातनी विनोद कुमार बिंदल के नेतृत्व में संपन्न हुए इस धार्मिक कार्यक्रम ने रामायण के आदर्शों को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया।


