पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में सियासी तापमान बढ़ गया है. वजह है मेयर का चुनाव. 29 जनवरी को होने वाले इलेक्शन के लिए आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस ने एकसाथ आने (BJP’s hat trick) का फैसला किया है. दोनों ने बीजेपी को हराने के लिए फिर से दोस्ती की है. इस चुनाव में बीजेपी की साख दांव पर है. उसके सामने सत्ता बचाने की चुनौती है. वहीं आप-कांग्रेस की लड़ाई अपनों से ही है.

बीजेपी और इंडिया गठबंधन दोनों के पास 18-18 वोट हैं. इंडिया एलायंस के पास जो 18 वोट हैं उसमें से 11 आम आदमी पार्टी के, 6 कांग्रेस के हैं. एक वोट चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी का है. इससे सदन में टाई होने की संभावना बन जाती है. ऐसी स्थिति में कानून के मुताबिक, मेयर का फैसला लॉटरी से होगा, जिससे यह हाई-स्टेक मुकाबला किस्मत का खेल बन जाएगा.

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आप और कांग्रेस के बीच समझौते के मुताबिक, आप मेयर पद के लिए चुनाव लड़ेगी, जबकि कांग्रेस सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव लड़ेगी. दोनों पार्टियों के नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह से एक बार का समझौता है और वे दिसंबर में होने वाले MC आम चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेंगे. चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष एचएस लकी ने कहा, इस समझौते का मुख्य मकसद मेयर चुनाव में बीजेपी को हराना है.

 BJP’s hat trick – सदन में बीजेपी की ताकत पिछले महीने बढ़ी है. आप की पार्षद पूनम और सुमन शर्मा बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं, जिसके बाद उसके पार्षदों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है. 29 जनवरी का चुनाव 2022 में चुनी गई हाउस का आखिरी मेयर चुनाव होगा. चंडीगढ़ के इतिहास में यह भी पहली बार होगा कि मेयर का चुनाव सीक्रेट बैलेट के बजाय खुले तौर पर हाथ उठाकर किया जाएगा.

 

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