भगवान विष्णु को समर्पित इस माह की पूर्णिमा पर स्नान, दान और पूजा का फल सामान्य पूर्णिमा की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
धार्मिक
अधिकमास को भगवान विष्णु का मास कहा जाता है। उन्होंने स्वयं इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ दिया है, जिसके कारण इसे पुरुषोत्तम माह या मलमास भी कहा जाता है।
वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है।
दंदरौआ धाम में विराजमान हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा को बेहद अद्भुत और अद्वितीय माना जाता है। यहां भगवान हनुमान को एक पेशेवर डॉक्टर के रूप में देखा और पूजा जाता है।
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल का विशेष और अत्यंत पूजनीय महत्व है। इस साल का चौथा बड़ा मंगल बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है।
हिंदू धर्म और वैदिक शास्त्रों में सप्ताह के हर एक दिन को किसी न किसी विशेष देवी-देवता की आराधना के लिए समर्पित किया गया है।
नौतपा यानी साल के वे नौ सबसे गर्म दिन, जब ब्रह्मांड के प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव का ताप अपने चरम पर और बेहद प्रचंड होता है।
ज्येष्ठ महीने के हर मंगलवार को मनाया जाने वाला बुढ़वा मंगल या ‘बड़ा मंगल’ भगवान हनुमान की विशेष कृपा प्राप्त करने का बेहद शुभ और पावन अवसर माना जाता है।
हिंदू और जैन धर्म में व्रतों और त्योहारों का विशेष महत्व है। इन्हीं महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है रोहिणी व्रत। जैन समुदाय में इस व्रत को बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है।
जेष्ठ अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं वट सावित्री व्रत रखती हैं। इस साल यह पावन व्रत 16 मई यानी शनिवार को रखा जाना है।

