दुर्ग: भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से करोड़ों रुपये के लौह स्क्रैप की चोरी मामले में पुलिस की जांच ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यह चोरी मात्र एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित (BSP Scrap Scam) सिंडिकेट का हिस्सा थी, जिसने पिछले 6 महीनों में संयंत्र को लगभग 17.87 करोड़ रुपये का चूना लगाया है।
कैसे पकड़ा गया करोड़ों का नेटवर्क?
पुलिस ने 26 मई को ग्राम अकलीरहीह में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 250 टन लौह स्क्रैप, फ्लू डस्ट और भारी मशीनरी जब्त की थी, जिसकी कीमत 3.22 करोड़ रुपये थी। मामले की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस ने सिंडिकेट के सरगना संजय सिंह को नेपाल सीमा के पास से और आकाश सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया है। अब तक इस मामले में कुल 13 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है।
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BSP Scrap Scam – जांच में यह बात सामने आई है कि भिलाई इस्पात संयंत्र के भीतर ही ‘फ्लू डस्ट’ परिचालन के नाम पर एक गुप्त कार्यालय संचालित किया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, यहीं से पर्दे के पीछे रहकर चोरी के पूरे नेटवर्क को नियंत्रित किया जाता था। पुलिस ने इस कार्यालय से वीडियो और फोटोग्राफी के जरिए कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं, जो मामले के मास्टरमाइंड्स तक पहुँचने में मदद करेंगे।
बड़े नामों की तलाश और जांच का दायरा
पुलिस के अनुसार, पिछले 6 महीनों में 3,250 टन से अधिक लोहा प्लांट से चोरी कर बाहर खपाया गया। वर्तमान में हिमांशु खंडेलवाल, गिरीश खंडेलवाल, जान सलीम और 10 हजार रुपये के इनामी आरोपी अभय सिंह समेत कई अन्य संदिग्ध पुलिस की रडार पर हैं। दुर्ग रेंज के आईजी अभिषेक शांडिल्य ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति पर्दे के पीछे रहकर इस खेल को संचालित कर रहे थे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
