आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के संस्थापक नेता अटल विहारी वाजपेयी की 95वीं जंयती है| पूरे देश में भारतरत्न अटल विहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजली दी जा रही है| आज सुबह अटल विहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर उनके समाधि स्थल पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला,पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए|
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आज देश में मनाया जा रहा है पूर्व प्रधानमंत्री का जन्मदिन
क्रिसमस के दिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी का भी जन्म हुआ था| 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में जन्में अटल जी एक अच्छे राजनेता होने के साथ-साथ एक प्रसिद्ध कवि भी थे| अटल विहारी वाजपेयी ने अपने राजनितिक सफर में बहुत सारी कठनाईयों का सामना भी करना पड़ा था| आज हम आपको उस नेता एवं कवि कि कहानी बता रहे है| कैसे इस नेता ने जमीन पर संघर्ष करते हुए एक बड़ा मुकाम हासिल किया| लेकिन आज भी उनकी यांदे लोगों के दिल में बसी है| अटल जी भारत के लोकप्रिय नेताओं में से एक थे| जब वह अपना भाषण शुरू करते थे| लोग उन्हें सुनने के लिए खड़े हो जाते थे| उनकी आवाज इतनी मधुर थी कि लोग उनकी रैलीयों में सिर्फ भाषण सुनने के लिए दूर- दूर से आया करते थे|
विरोधी नेता भी उनके भाषण के कायल हो जाते थे
अटल जी के भाषण देने की कला सिर्फ उनके चाहने वाले ही नहीं बल्कि उनके भाषण के विरोधी नेता भी कायल हुआ करते थे| वाजपेयी भाषण में जहां विरोधियों पर निशाना साधते तो इसी बीच वह कविताओं को सुना कर जनता का मन मोह लेते थे| उन्होनें अपनी जीवन की शुरूआत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा में पल- बढ़ कर की और वहीं से उन्होनें अपनी एक राजनेता के रूप में पहचान बनाई| उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन को दलगत और स्वार्थ की वैचारिकता से अलग हट कर अपनाया और उसको अपने हिसाब से जिया| अटल जी ने अपने जीवन में आने वाली हर विषम परिस्थितियों और चुनौतियों को स्वीकार किया,साथ ही उन्होंने नीतिगत सिद्धांत और वैचारिकता का कभी कत्ल नहीं होने दिया|
अटल जी अपनी पहचान एक कवि के रूप में देखना चाहते थे
वह अपनी पहचान एक कवि के रूप में बनाना चाहते थे| लेकिन उनकी शुरुआत पत्रकारिता से हुई| पत्रकारिता ही उनके राजनैतिक जीवन की आधारशिला बनी| उन्होंने संघ के मुखपत्र पांचजन्य,राष्ट्रधर्म और वीर अर्जुन जैसे अखबारों का संपादन किया|अटल जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए हिंदी में भाषण देने वाले अटलजी पहले भारतीय राजनीतिज्ञ थे|
हिन्दी को सम्मानित करने का काम विदेश की धरती पर अटलजी ने किया| पोखरण जैसा आणविक परीक्षण कर दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के साथ दूसरे मुल्कों को भारत की शक्ति का अहसास कराया| जनसंघ के संस्थापकों में से एक अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक मूल्यों की पहचान बाद में हुई और उन्हें बीजेपी सरकार में भारत रत्न से सम्मानित किया गया|
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मिठाई और पकवानों के बुहत शौकीन थे पूर्व प्रधानमंत्री
बताया जाता है कि अटल जी मिठाईयों के बहुत बड़े शौकीन थे| इन शौक की वजह से गेट पर खड़े जवान ऐसे लोगों को अटल जी से मिलने से रोक नहीं पाते थे| एक तरह से मिठाई का डब्बा लोगों के लिए अटल जी से मिलने के लिए गेट पास था| अटल जी के साथ काम कर चुके नौकरशाह भी बताते हैं कि वह जहां कहीं भी जाते थे वहां के स्थानीय पकवानों का स्वाद चखना नहीं भूलते थे| कहा जाता है कि कोलकाता का पुचका,हैदराबाद में बिरयानी और हलीम और लखनऊ में गलावटी कबाब का स्वाद चखना नहीं भूलते थे| इसके अलावा चाट मसाले के साथ पकौड़े और मसाला चाय पसंद करते थे।
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