जमुई (बिहार): जमुई रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर एक महिला की दर्दनाक मौत के बाद जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, उन्होंने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली और मानवीय संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटनास्थल से महज 100 मीटर की दूरी पर शव को ले जाने में करीब 11 घंटे का लंबा समय लग गया।

इस पूरी अवधि के दौरान शव रेलवे ट्रैक के किनारे लावारिस स्थिति में पड़ा रहा और बेबस परिजनों को घंटों तक वहीं बैठकर उसकी रखवाली करनी पड़ी। हैरान करने वाली बात यह रही कि शव को उठाने के लिए प्रशासन की ओर से एक स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया। आखिरकार बदहवास परिजनों ने रेलवे से आए डोम की मदद से शव को एक बोरे में बांधा और खुद अपने हाथों से उठाकर मलयपुर रेलवे फाटक पर खड़े टेंपो तक पहुंचाया, जिसके बाद पोस्टमार्टम के लिए शव सदर अस्पताल भेजा जा सका।

🔍 शनिवार देर शाम से लापता थीं महिला: सुबह साड़ी देखकर परिजनों ने की पहचान

लापता होने से शव मिलने तक का घटनाक्रम:

  • घर से लापता थीं अंजू देवी: मिली जानकारी के अनुसार, मलयपुर निवासी अशोक सिंह की 50 वर्षीय पत्नी अंजू देवी शनिवार देर शाम से अचानक घर से लापता थीं। वह घर पर अपनी बहू और सास के साथ रहती थीं, जबकि उनके पति और दोनों बेटे गोवा में रहकर मजदूरी करते हैं।

  • रातभर तलाशते रहे परिजन: रात में काफी खोजबीन के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिला। इसी दौरान स्थानीय लोगों से जानकारी मिली कि एक महिला रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आ गई है।

  • अंधेरे के कारण पहचान में देरी: रात में अंधेरा अधिक होने के कारण शव की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। सुबह उजाला होने पर परिजनों ने मौके पर पहुंचकर साड़ी देखकर शव की पहचान अंजू देवी के रूप में की।

  • सूचना के बावजूद देरी का आरोप: स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना की सूचना रात में ही स्टेशन और गेटमैन को दे दी गई थी, इसके बावजूद शव को ट्रैक से हटाने में अत्यधिक लापरवाही बरती गई।

🦅 कौवे नोचते रहे शव, परिजनों ने घंटों की रखवाली: GRP पर खड़े रहे दूर देखने का आरोप

परिजनों की बेबसी और बदइंतजामी:

  • स्ट्रेचर और एंबुलेंस नदारद: मृतका के भाई सतीश कुमार सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जीआरपी (GRP) की ओर से न तो कोई स्ट्रेचर मुहैया कराया गया और न ही किसी एंबुलेंस की व्यवस्था की गई।

  • जानवरों से शव बचाने की जद्दोजहद: सतीश के अनुसार, शव ट्रैक के किनारे लावारिस पड़ा रहा और जंगली कौवे उसे नोच रहे थे। शव को जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए परिजनों को तेज धूप और ट्रैक के किनारे खुद घंटों बैठकर पहरा देना पड़ा।

  • तमाशबीन बने रहे कर्मी: परिजनों का आरोप है कि घटनास्थल पर जीआरपी के जवान और संबंधित रेलकर्मी मौजूद थे, लेकिन वे मदद करने या शव के पास जाने के बजाय काफी दूर खड़े होकर केवल तमाशा देखते रहे।

📦 बोरे में बांधकर टेंपो तक ले जाया गया शव: परिजनों ने खुद की वाहन की व्यवस्था

शव उठाने के दौरान प्रशासनिक विफलता:

  • बोरे में बांधने की मजबूरी: जब शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की बारी आई और स्ट्रेचर नहीं मिला, तो परिजनों ने रेलवे से आए डोम के साथ मिलकर शव को एक साधारण बोरे में बांधा।

  • कंधों पर उठाकर फाटक तक पहुंचे: परिजनों ने खुद उस बोरे को उठाया और लगभग 100 मीटर की दूरी पैदल तय करके मलयपुर रेलवे फाटक तक पहुंचाया।

  • निजी टेंपो का सहारा: अस्पताल तक शव ले जाने के लिए टेंपो का इंतजाम भी परिजनों को अपने स्तर पर ही करना पड़ा। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में शव सदर अस्पताल भेजा गया।

👮‍♂️ स्टेशन मास्टर और जीआरपी का बयान: सुबह मिली थी आधिकारिक सूचना

प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष:

  • स्टेशन मास्टर का कहना: स्टेशन मास्टर के अनुसार, उन्हें रविवार सुबह लगभग 5:35 बजे घटना की आधिकारिक सूचना प्राप्त हुई थी, जिसके बाद 5:45 बजे जीआरपी को सूचित कर दिया गया।

  • जीआरपी की सफाई: जीआरपी के एएसआई सुनील कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और जरूरी कानूनी व कागजी प्रक्रियाएं पूरी कीं। जीआरपी थानाध्यक्ष श्रवण कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला ट्रेन की चपेट में आने का प्रतीत होता है।

  • स्ट्रेचर पर अस्पष्ट जवाब: जब थानाध्यक्ष से स्ट्रेचर न मिलने पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि जीआरपी के पास स्ट्रेचर मौजूद हैं, लेकिन घटना के समय वे उपलब्ध क्यों नहीं थे या किसी अन्य स्थान पर भेजे गए थे, इसकी जांच की जाएगी।

❓ प्रशासनिक संवेदनहीनता पर उठे गंभीर सवाल: क्या यही है रेलवे की आपात व्यवस्था?

जवाबदेही और व्यवस्था पर उठते सवाल:

  • सिस्टम की नाकामी: यदि जीआरपी के पास स्ट्रेचर और संसाधन उपलब्ध थे, तो परिजनों को अपनी ही मृत परिजन के शव को बोरे में बांधकर ढोने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा?

  • जांच का आश्वासन: फिलहाल जीआरपी महिला की मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की पुष्टि होगी।

  • सवालों के घेरे में रेल प्रशासन: घटना स्थल से महज कुछ दूरी पर शव को हटाने में लगे 11 घंटे और बुनियादी मानवीय गरिमा का अभाव जमुई में रेल प्रशासन के आपातकालीन तंत्र की पोल खोलने के लिए काफी है।

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