जिस जमीन पर आज खेती हो रही है और गांव व शहर बसे हैं, उसी धरती के नीचे ऐसे बहुमूल्य खनिज मौजूद हो सकते हैं जो भविष्य की तकनीक और उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। बिहार सरकार अब राज्य में खनिज भंडारों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रही है। सैटेलाइट डेटा, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, भू-रासायनिक जांच और 3D मैपिंग की मदद से राज्य के सभी 38 जिलों में 7,000 से अधिक सम्भावित स्थलों पर गहन अध्ययन किया जाएगा। यदि इन स्थानों पर खनिजों की मौजूदगी की पुष्टि होती है, तो बिहार में उद्योग, निवेश और रोजगार (Economy & Mining) के अभूतपूर्व अवसर पैदा हो सकते हैं।
इस राष्ट्रव्यापी खोज अभियान में क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और बेस मेटल्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनका उपयोग ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, परिवहन और रक्षा जैसे उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में होता है:
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लिथियम: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और स्मार्टफोन की रिचार्जेबल बैटरियों का मुख्य आधार है।
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वैनेडियम: मजबूत स्टील और एनर्जी स्टोरेज बैटरियों में बेहद उपयोगी है।
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टाइटेनियम: हल्का और बेहद मजबूत होने के कारण एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग में काम आता है।
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रेयर अर्थ एलिमेंट्स: इलेक्ट्रिक मोटर, विंड टर्बाइन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अनिवार्य हैं।
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रोहतास, गया और जमुई में अपार संभावनाएं
पूर्व में किए गए अध्ययनों के अनुसार रोहतास में ग्लूकोनाइट (पोटाश उर्वरक के लिए), गया में वैनेडियम, जमुई में लौह अयस्क, नवादा में लिथियम तथा बांका व मुंगेर में फेल्डस्पार व सिलिका सैंड की संभावनाएं जताई गई हैं। खनिज अन्वेषण की प्रक्रिया G-4 से शुरू होकर G-1 (विस्तृत अन्वेषण) तक पूरी होगी। यदि परिणाम अनुकूल रहे, तो पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के जरिए खनन के लाइसेंस दिए जाएंगे। अनुमानों के मुताबिक, इस योजना से राज्य को सालाना ₹21,000 करोड़ तक का राजस्व मिल सकता है और करीब 4.18 लाख प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं।


