लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में यौन शोषण, जबरन धर्मांतरण और “लव जिहाद” से जुड़े गंभीर मामले की जांच अब उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) कर सकती है. फैक्ट-फाइंडिंग (big syndicate of love jihad) कमेटी ने इसकी सिफारिश की है, जिसके बाद KGMU प्रशासन ने शासन को औपचारिक पत्र लिखकर STF से जांच कराने की मांग की है.
KGMU की सात सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी, जिसके चेयरपर्सन पूर्व डीजी भावेश कुमार हैं. भावेश कुमार ने मामले की गहराई और संभावित संगठित नेटवर्क को देखते हुए STF स्तर की जांच की जरूरत बताई है. कमेटी के सदस्य पूर्व डीजी भावेश कुमार पिछले कई दिनों से STF को पूरे मामले की अपडेट दे रहे थे.
इसे भी पढ़ें – थाना बना ‘कत्लगाह’: हरदोई में पुलिस के सामने ही पति ने पत्नी को गोलियों से भूना
कमेटी चेयरपर्सन ने STF को जांच सौंपने की पुष्टि की है. यह कमेटी मुख्य आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन नायक (उर्फ रमीज मलिक) के अलावा अन्य संभावित शामिल लोगों, संस्थान में कट्टरपंथी गतिविधियों और व्यापक नेटवर्क की जांच कर रही थी. रिपोर्ट में यौन शोषण, ब्लैकमेल, जबरन गर्भपात और धर्मांतरण के दबाव के सभी आरोप सिद्ध पाए गए हैं.
big syndicate of love jihad – मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के नेतृत्व में KGMU परिसर में हंगामा हुआ. अपर्णा यादव और उनके समर्थकों ने कुलपति ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया, जिसमें तोड़फोड़, गमले फेंकना और कंप्यूटर गिराने जैसी घटनाएं हुईं. KGMU प्रशासन ने इसे गुंडागर्दी करार देते हुए चौक थाने में तहरीर दी और FIR की मांग की.


