रांची : झारखंड की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं और धांधली की CID जांच अब अपने सबसे निर्णायक चरण में पहुँच चुकी है। मामले की गहन तफ्तीश कर रही CID अब तक इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण में कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। प्रथम दृष्टया ये गिरफ्तारियां पृथक-पृथक प्रतीत हो सकती हैं, परंतु (big revelation in jpsc exam rigging) जब इन सभी कड़ियों को एक साथ जोड़कर देखा जाता है, तो इस संपूर्ण नेटवर्क की 3 बड़ी परतें स्पष्ट रूप से आपस में जुड़ती नजर आती हैं।
CID ने आयोग की तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन श्वेता कुमारी गुप्ता और JPSC कर्मचारी सोनू कुमार को गिरफ्तार किया, जिससे स्पष्ट हुआ कि जांच आयोग के भीतर की भूमिका तक विस्तृत है। दूसरी और सबसे बड़ी कड़ी परीक्षा संचालन व डेटा प्रोसेसिंग का जिम्मा संभालने वाली निजी एजेंसी ‘TSR Data Processing Pvt. Ltd.’ (TDPL) है। CID ने एजेंसी के डायरेक्टर रामवीर सिंह, कर्मचारी मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद एबाद, हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार को गिरफ्तार कर जांच का केंद्र सीधे डेटा प्रोसेसिंग प्रक्रिया पर केंद्रित कर दिया है।
big revelation in jpsc exam rigging – मामले का सबसे चर्चित नाम अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी है, जो सरकारी सेवा में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर होने के साथ-साथ TDPL से भी कथित रूप से जुड़ा हुआ था। CID उसे इस पूरे आपराधिक सिंडिकेट की सबसे अहम कड़ी मानकर उसके संपर्कों और परीक्षा प्रक्रिया में भूमिका की पड़ताल कर रही है। इसके अतिरिक्त उसके सहयोगी अरविंद कुमार, उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत, रमेश कुमार और अमित कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनसे लगातार पूछताछ जारी है।
