बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पूरी होने के बाच चुनाव आयोग अब इसे सिलसिलेवार तरीके से पूरे देश में करवा रहा है. इसी कड़ी में केरल में एसआईआर की गणना मंगलवार से शुरू हो चुकी है. हालांकि दक्षिण के इस छोटे से राज्य से कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं लगती, ऐसे में वहां पर घुसपैठिए या अवैध वोटर (neither infiltrators nor illegal voters) की संभावना कम ही रहती है, लेकिन करीब 30 लाख वोटर्स को यह डर सता रहा है कि उनके नाम वोटर लिस्ट से काटे जा सकते हैं.

केरल में करीब 30 लाख एनआरआई होने का अनुमान लगाया जा रहा है. कई एनआरआई परिवार तो ऐसे हैं जिनका पूरा परिवार ही विदेश में ही बसा हुआ है और केरल में उनके घर बंद पड़े हुए हैं. इसलिए उनकी चिंता यही है कि उनमें से ज्यादातर लोगों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर किए जाने का खतरा है.

neither infiltrators nor illegal voters – दूसरी ओर, राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बुधवार (5 नवंबर) को तिरुवनंतपुरम में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें एसआईआर के मसले पर सरकार के रुख पर चर्चा की गई. मुख्यमंत्री विजयन की अगुवाई में हुई सर्वदलीय बैठक में चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट में संशोधन को कानूनी चुनौती देने और इसके कार्यान्वयन का विरोध करने पर सहमति बनी़. बैठक में शामिल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को छोड़कर सभी दलों ने एसआईआर प्रोसेस के खिलाफ कानूनी रूप से आगे बढ़ने के राज्य के फैसले का समर्थन किया.

 

Share.
Exit mobile version