कोरबा। कोरबा की ऊर्जा क्षमता पर जोर देते हुए कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि यदि कोरबा से कोयले की आपूर्ति रुक जाए तो कई राज्यों में अंधेरा छा सकता है। उन्होंने कोरबा की भूमिका को देश की ऊर्जा व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए यहां के संसाधनों और श्रम शक्ति की सराहना की।

कोरबा के समीप ग्राम ढपढप में आयोजित हनुमंत कथा कार्यक्रम के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि यहां का कोयला न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देश के कई राज्यों की बिजली जरूरतों को पूरा करता है। यदि यहां से कोयले की आपूर्ति बाधित होती है तो इसका सीधा असर देश के बड़े हिस्से पर पड़ेगा और कई राज्यों में बिजली संकट गहरा सकता है।

कोरबा देश की ऊर्जा रीढ़ के रूप में कार्य कर रहा

उन्होंने कहा कि कोरबा देश की ऊर्जा रीढ़ के रूप में कार्य कर रहा है और यहां के खनिज संसाधन राष्ट्रीय विकास में अहम योगदान दे रहे हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों की मेहनत और यहां की उत्पादन क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दिव्य दरबार भी लगाया जाएगा

कथा के दौरान पंडित शास्त्री ने कहा कि वे एक अप्रैल तक कोरबा में रहेंगे। इस दौरान हनुमंत कथा के साथ दिव्य दरबार भी लगाया जाएगा। अपने प्रवचन में उन्होंने सुंदरकांड के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुंदरकांड एकमात्र ऐसा पाठ है, जिससे भारत की दिशा और दशा दोनों बदली जा सकती है।

घर वापसी करने वालों का स्वागत

उन्होंने कोरबा, रायगढ़, जशपुर और बिलासपुर के लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि जो लोग घर वापसी करना चाहते हैं, उनका स्वागत है। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और यहां के लोगों के सरल स्वभाव की भी सराहना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिन्होंने उनके विचारों को ध्यानपूर्वक सुना।

अभी हमारी शादी भी नहीं हुई और हम छुरी आ गए

कथा के बीच पंडित शास्त्री ने हास्य-परिहास का तड़का भी लगाया। उन्होंने रास्ते में पड़ने वाले छुरी गांव का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि अभी हमारी शादी भी नहीं हुई और हम छुरी आ गए, जिससे पंडाल में ठहाके गूंज उठे।

ढपढप में आयोजित यह दिवसीय हनुमंत कथा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी हुई है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समागम का भी प्रतीक बन गई है।

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