राजस्थान हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) को निर्देश दिया है कि मृत कर्मचारी की पत्नी (यानी बहू) की मासिक सैलरी से 25 प्रतिशत राशि काटकर सीधे उसकी सास के बैंक खाते में जमा की जाए. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था सास के जीवित रहने तक लगातार जारी रहेगी. जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह फैसला सास-ससुर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है, हालांकि सुनवाई के दौरान ससुर का निधन हो चुका था.

📋 2. नौकरी मिलने के बाद बहू ने छोड़ा ससुराल और बंद की मदद, कोर्ट ने कहा—अनुकंपा नियुक्ति कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि कल्याणकारी व्यवस्था है

मामले के अनुसार, AVVNL में टेक्निकल हेल्पर के पद पर कार्यरत कर्मचारी की मार्च 2017 में मौत हो गई थी, जिसके बाद परिवार की सहमति और इस शपथ पत्र के आधार पर कि वह भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठाएगी, बहू को अनुकंपा नौकरी दी गई थी. लेकिन सास-ससुर का आरोप था कि नौकरी मिलने के बाद बहू ने ससुराल छोड़ दिया, दूसरी शादी कर ली और उनकी देखभाल करना बंद कर दिया. इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई व्यक्तिगत विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह संकट में फंसे पूरे परिवार को आर्थिक संबल देने की व्यवस्था है.

💰 3. टर्मिनल बेनिफिट्स को सास और बहू के बीच बराबर बांटने का भी आदेश, 30 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

बहू की ओर से दलील दी गई थी कि दुर्व्यवहार के कारण उसने घर छोड़ा था और उसकी सैलरी पर उसका अकेला अधिकार है, लेकिन कोर्ट ने इन तर्कों को दरकिनार कर दिया. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने दिवंगत कर्मचारी से जुड़े सभी टर्मिनल बेनिफिट्स को 30 दिनों के भीतर जारी करने का आदेश दिया है, जिन्हें सास और बहू के बीच बराबर-बराबर (50-50 प्रतिशत) बांटा जाएगा. इस फैसले को परिवार के बुजुर्गों के आर्थिक संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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